फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अमर उजाला एक्सक्लूसिव रिपोर्ट: राशन की कालाबाजारी का बड़ा 'खेल', सिस्टम हुआ फेल

Thu, 08 Aug 2019 04:03 AM IST
कपिल kapil राजकुमार सैनी, अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
राशन गल्ले की दुकान - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

मेरठ शहर में किसी भी दुकान से पात्र उपभोक्ता द्वारा ऑनलाइन व्यवस्था से राशन लेने की सुविधा कालाबाजारी के खेल में धड़ाम हो गई है। पांच अगस्त से शुरू हुई इस योजना के सही क्रियान्वयन में सिस्टम फेल साबित हो रहा है। अपने हक का राशन पाने के लिए राशन कार्ड धारकों को जद्दोजहद करनी पड़ रही है। 

विज्ञापन


क्या है नई व्यवस्था
ऑनलाइन व्यवस्था होने से महानगर के राशन कार्ड धारकों को पांच अगस्त 2019 से शहर की किसी भी दुकान से राशन लेने की आजादी दी गई है। यानी कोई पात्र धारक ब्रह्मपुरी क्षेत्र का निवासी है तो अब वह मोहनपुरी की किसी सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान से भी राशन ले सकता है। यह घोषणा जिलाधिकारी ने की थी। महानगर में वर्तमान में सरकारी राशन की 336 दुकानें हैं। पूरे जिले में करीब साढ़े पांच लाख राशन कार्ड हैं। 

व्यवस्था फेल होने के कारण
योजना फेल होने के कारणों की पड़ताल के लिए अमर उजाला की टीम ने बुधवार को महानगर की सरकारी सस्ते गल्ले की कई दुकानों का जायजा लिया। सामने आया कि फिलहाल यह व्यवस्था शहरी क्षेत्र में ही शुरू की गई। लेकिन योजना लागू होने के तीसरे दिन ही धड़ाम हो गई। शहर की 50 प्रतिशत से अधिक दुकानों के जहां ताले ही नहीं खुले तो वहीं बाकी दुकानों पर दूसरी एजेंसियों से कार्ड धारकों को राशन नहीं दिया गया।

जनता आपूर्ति विभाग के अधिकारियों से शिकायत करती रही, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। साफ हो गया कि न तो राशन की दुकानें नियमित खुल रही हैं और न ही शासन के आदेश का पालन हो रहा है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि राशन डीलरों के लिए शासन और प्रशासन के आदेश कितने मायने रखते हैं।

केस 01:
शकूरनगर में अखलाक राशन की दुकान चलाते हैं। मोहल्ला गुलजारे इब्राहिम की राशन कार्ड धारक  महिला शरीफन, परवीन, कज्जो, फरजाना, रिहाना, संजीदा, जैबुनिशा बुधवार सुबह 10 बजे दुकान पर पहुंचीं। महिलाओं का आरोप है कि राशन डीलर ने दूसरी दुकानों के कार्ड धारक होने की बात कहकर राशन देने से मना कर दिया। सलीम सिद्दीकी ने चेतावनी दी कि अगर राशन वितरकों ने सुधार नहीं किया तो डीएम से शिकायत की जाएगी।  

केस 02:
श्यामनगर में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान सलीम अहमद और इरशाद अहमद चलाते हैं। इस दुकान से कई दुकानें अटैच की गयी हैं। बुधवार सुबह 10:15 बजे दुकान पर ताला लटका मिला।   

केस 03:
राजेंद्र नगर गली नंबर एक में जनहित ग्रामोद्योग संघ की सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान है। इस दुकान पर दो अन्य दुकानों को भी अटैच किया गया है। सुबह करीब 11 बजे दुकान पर ताला लटका मिला। वार्ड पार्षद राकेश शर्मा का कहना है कि राशन डीलर की शिकायत लेकर जनता प्रतिदिन हमारे पास आती है। शिकायत के बाद भी अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं करते। 

केस 04:
कंकरखेड़ा रामनगर में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान पर दोपहर 2:30 बजे ताला लटका मिला। स्थानीय लोगों ने बताया कि दुकान कभी कभी खुलती है। 

केस 05:
कंकरखेड़ा के गुरुनानक बाजार में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान पर दोपहर 2:40 बजे ताला लटका मिला।
विज्ञापन

यहां मिला वितरण
शताब्दीनगर में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान सुनील कुमार चलाते हैं। यह दुकान पूर्वाह्न 11 बजे खुली मिली। राशन वितरण किया जा रहा था। इसके अलावा सुभाषनगर मुख्य मार्ग पर स्थित राशन की दुकान पर राशन वितरण होता पाया गया। 

मॉनिटरिंग में सभी विभाग फेल 
सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों पर राशन वितरण कराने की जिम्मेदारी सरकारी अधिकारियों की है। इसके लिए आपूर्ति विभाग ही नहीं बल्कि अन्य सरकारी विभाग के अधिकारियों की भी ड्यूटी लगाई जाती है। नियमानुसार तो अधिकारियों को अपने सामने ही राशन वितरण कराना होता है। अब सवाल है कि अगर जिम्मेदार अधिकारी राशन वितरण को लेकर गंभीर होते तो शहर की सभी राशन की दुकानें भी नियमित खुलतीं और गरीबों को नई व्यवस्था के अनुरूप राशन भी मिलता।  

जांच के बाद होगी कार्रवाई
पांच अगस्त से कार्ड धारकों को छूट है कि वह किसी भी दुकान से राशन लें। हमारे हिसाब से सभी दुकानें खुल रही हैं और राशन वितरण हो रहा है। अगर कोई दुकानदार नहीं दे रहा है अथवा दुकान बंद रखता है तो उसके खिलाफ जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। टीमें लगातार दुकानों पर राशन वितरण की मानीटिरिंग कर रही हैं। - विकास गौतम, जिलापूर्ति अधिकारी

नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें