मेरठ में नगरीय क्षेत्र के परिषदीय स्कूलों का हाल बद से बदतर हो चला है। कहीं जमीन के अभाव में एक ही कमरे के स्कूल में बच्चे सिमटकर पढ़ने को मजबूर हैं, तो कहीं बेशुमार जमीन होने के बावजूद एक ही परिसर में चार स्कूल चल रहे हैं। सभी के प्रधानाध्यापक अलग-अलग हैं। लेकिन यहां भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। ऊपर से स्कूल के सामने शराब का ठेका चल रहा है। स्कूल परिसर में कहीं दबंग तो कहीं शराबी हावी रहते हैं। बेटियां यहां खौफ में साये में पढ़ती हैं।
यहां है यह स्कूल परिसर
दिल्ली रोड पर शहर के बीचोबीच केसरगंज पुलिस चौकी के ठीक सामने काफी जमीन खाली पड़ी है। शनिवार को अमर उजाला की टीम केसरगंज क्षेत्र के सरकारी स्कूलों का हाल जानने पहुंची तो यहां एक ही परिसर में चार स्कूल चलते मिले। यहां का नजारा ऐसा मिला जैसे किसी गांव देहात में बच्चे पढ़ने जाते हैं। यहां बच्चों की कमी नहीं। कमी तो बस सिस्टम में सुधार की नजर आई।
स्कूल: 01 उच्च प्राथमिक कन्या विद्यालय केसरगंज
यहां के प्रधानाध्यापक मुनेश गुप्ता छुट्टी पर थे। छह शिक्षिकाओं के हाथों में स्कूल की बागडोर है। शिक्षिकाएं छात्राओं को जमीन पर ही पढ़ा रही थीं। इस दौरान सांप जैसा कीड़ा निकला तो बच्चियां इधर-उधर भागने लगीं। पहली से आठवीं तक के इस स्कूल में 127 छात्राएं हैं। स्कूल में फर्नीचर की कमी है। छात्राएं दरी पर बैठकर ही पढ़ती हैं। यहां जगह नहीं सुविधाओं की कमी है। स्कूल के नए भवन समेत कुल पांच कमरे हैं। लेकिन बिजली व पानी सहित अन्य सुविधाएं नाकाफी हैं। स्कूल के सामने ही शराब का ठेका है। अक्सर शराबी स्कूल परिसर में आकर लेट जाते हैं। बच्चियां खौफ के बीच पढ़ती हैं।
स्कूल 02: उच्च प्राथमिक बालक विद्यालय केसरगंज
इस स्कूल की हालत भी दयनीय नजर आई। स्कूल भवन में दो बड़े कमरे हैं, जबकि 25 छात्र ही पढ़ने आते हैं। प्रधानाध्यापक सरफराज स्कूल में मौजूद थे। एक चपरासी राकेश घर जा चुका था। स्कूल में दो बच्चे ही थे जो गेट पर ही बैठकर पढ़ रहे थे। यहां भी पेयजल, बिजली आदि सुविधा की कमी मिली। प्रधानाध्यापक के अनुसार सबसे बड़ी समस्या स्कूल के सामने शराब का ठेका है। शराबियों के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्कूल 03 : प्राथमिक विद्यालय कन्या पूर्वा महावीर
यह विद्यालय 2008 में पूर्वा महावीर के किराए के भवन से केसरगंज परिसर में शिफ्ट हुआ। लेकिन सुविधाएं नहीं मिलीं। स्कूल में दो कमरे और 73 बच्चे है। स्कूल की प्रधानाध्यापिका नसरीन जमाल ने बताया कि वे अकेले ही 73 बच्चों को संभालती हैं। रिटायरमेंट में चार साल हैं। एक शिक्षिका पारुल शर्मा थी, जिनका ट्रांसफर हो गया।
स्कूल 04 : प्राथमिक विद्यालय शांति नगर
यह विद्यालय दो साल पहले रेलवे रोड़ शांति नगर से स्थानांतरण होकर केसरगंज परिसर में आया है। यहां 54 बच्चे हैं। लेकिन न तो प्रधानाध्यापिका बीना वर्मा और न कोई बच्चा स्कूल में मिला। स्कूल में शिक्षामित्र शबाना खान मौजूद मिलीं। यहां लगा सरकारी नल ठप मिला। स्कूलों में दो कमरे है। लेकिन सभी बच्चे एक ही कमरे में पढ़ते हैं।