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पति की हत्या में पत्नी व उसके प्रेमी समेत चार को आजीवन कारावास

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मेरठ। ब्रह्मपुरी क्षेत्र में साढ़े 12 वर्ष पूर्व हुए देवेंद्र हत्याकांड में कोर्ट ने पत्नी रजनी, उसके प्रेमी गौरव और वीनू कुम्हार व विपिन त्यागी को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर जिला जज फास्ट ट्रैक कोर्ट कल्पना चौहान ने सभी दोषियों पर 70 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
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ब्रह्मपुरी क्षेत्र के मोहल्ला पंजाया निवासी देवेंद्र दिल्ली रोड स्थित मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में कार्यरत था। 23 फरवरी 2013 को देवेंद्र लापता हो गया और ड्यूटी से घर नहीं लौटा। मां रामवती ने देवेंद्र की पत्नी रजनी और उसके प्रेमी गौरव निवासी माधवपुरम सेक्टर एक के खिलाफ अपहरण कर हत्या का आरोप लगाया था। इसकी शिकायत रामवती ने एडीजी एनसीआर ओपी सिंह से की थी। इसके बाद पुलिस हरकत में आई और गौरव व रजनी को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक, प्रेम संबंधों का विरोध करने पर रजनी ने अपने प्रेमी गौरव और उसके दोस्तों से पति देवेंद्र की हत्या कराई थी।
गौरव के दोस्तों को एक लाख रुपये देने का आश्वासन दिया था। इसके बाद गौरव ने एक इंडिका कार ली और अपने दोस्त वीनू कुम्हार, विपिन त्यागी व अन्य के साथ मिलकर 23 फरवरी की शाम देवेंद्र का दिल्ली चुंगी से अपहरण कर लिया। घटना वाली रात में ही गौरव व उसके साथियों ने देवेंद्र की गला घोंट कर हत्या कर शव जानी गंगनहर में फेंक दिया था। 14 दिन बाद उसका शव गंगनहर से बरामद हुआ था।
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वीनू की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त इंडिका कार माधवपुरम सेक्टर तीन से बरामद की गई थी। इस मामले में गौरव के दोस्त अंकित और प्रशांत के नाम भी प्रकाश में आए थे। सभी को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने के बाद पुलिस ने मामले में 28 मई 2013 को कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था। अंकित और प्रशांत को कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था। सोमवार को न्यायालय ने गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर चारों दोषियों को सजा सुनाई।



अपहरण व पॉक्सो एक्ट के दोषी को साढ़े तीन वर्ष का कारावास

मेरठ। सरधना में क्षेत्र के एक गांव से 15 वर्षीय किशोरी के अपहरण के मामले में दोषी सागर को न्यायालय अपर जिला जज संगीता ने साढ़े तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। मई 2016 में किशोरी के पिता ने सागर और विजय के खिलाफ पुत्री का बहला-फुसलाकर अपहरण कर ले जाने और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचना के दौरान विजय की नामजदगी गलत पाई गई। जबकि सागर के खिलाफ धाराओं में साक्ष्य प्रमाणित हुए। गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर सोमवार को न्यायालय ने दोषी पाते हुए सजा सुनाई। संवाद
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