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जज्बे से मिली जीत: मेरठ के चार और जांबाज सेना में बने लेफ्टिनेंट, तीन के पिता सेना में कर चुके हैं सेवा

Sun, 13 Jun 2021 01:50 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

कोरोना के कारण परिवार के लोग इस एतिहासिक पल को भले ही नहीं देख पाए, लेकिन बेटों के हौसले पर गर्व कर रहे हैं।
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मेरठ: अनुराध राठौर और सिद्धार्थ त्यागी। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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क्रांतिधरा के लोगों का सीना एक बार फिर गर्व से चौड़ा हो गया है। मेरठ के चार जांबाज सेना में लेफ्टिनेंट बन गए हैं। देहरादून और सिकंद्राबाद में हुई पासिंग आउट परेड में सिद्धार्थ त्यागी, अनुराग राठौर, सनोवर अहमद और आशीष शर्मा को देश सेवा की कमान सौंपी गई। कोरोना के कारण परिवार के लोग इस एतिहासिक पल को भले ही नहीं देख पाए लेकिन, बेटों के हौसले पर गर्व कर रहे हैं। तीन अधिकारियों के पिता सेना से सेवानिवृत्त हुए हैं। 

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आईआईटी की तैयारी, एनडीए में सफलता
गढ़ रोड स्थित सोमदत्त सिटी निवासी लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ त्यागी ने बताया कि 2017 में दीवान इंटरनेशनल स्कूल से 95 प्रतिशत अंकों से बारहवीं करने के बाद उन्होंने आईआईटी की तैयारी शुरू की थी। इसी दौरान एनडीए की प्रवेश परीक्षा दी। उनका चयन भी हो गया।

उनके जुड़वां भाई ऋषभ त्यागी ने बीटेक कंप्यूटर साइंस में किया। वह इंफोसिस में इंजीनियर हैं। परिवार में पिता राजीव त्यागी केन्या में रामोडा सेरामिक लिमिटेड में मैनेजर हैं। वहीं, माता कविता त्यागी गृहणी हैं। सिद्धार्थ को पहली पोस्टिंग मिलने के साथ ही 21 दिन का अवकाश दिया गया है।

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जुनून ने बना दिया सिपाही से लेफ्टिनेंट
कंकरखेड़ा स्थित तुलसी कॉलोनी निवासी अनुराग राठौर ने बताया कि 2009 में आर्मी पब्लिक स्कूल से 63 प्रतिशत अंकों से बाहरवीं की परीक्षा पास की थी। 2013 में सेना में सिपाही बन गए और चार वर्ष तक इंजीनियर्स कोर में सेवा की। अधिकारी बनने का जुनून था।

आर्मी कैडेट कॉलेज से कमीशन होते हुए उन्हें लेफ्टिनेंट का पद मिल गया। उन्हें पहली पोस्टिंग गढ़वाल राइफल्स और कारगिल के द्रास सेक्टर में मिली है। पिता आरपी सिंह सेना से सेवानिवृत्त हैं और माता प्रतिला ठाकुर गृहणी हैं। छोटा भाई मानस राठौर सेना में ही जालंधर में सेवारत है।

बचपन से ही था देश सेवा का जज्बा
फाजलपुर स्थित सैनिक विहार निवासी सनोवर अहमद ने एपीएस आर्य पब्लिक स्कूल से 79 प्रतिशत अंक पाकर बारहवीं की परीक्षा पास की थी। वह एनडीए प्रवेश परीक्षा पास कर इस मुकाम तक पहुंचे। पिता इरशाद अहमद सेना से सेवानिवृत्त हैं। वहीं, माता फरीदा बेगम गृहणी हैं।
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तीन भाई वसीम मेडिकल क्षेत्र, शाहिद अध्यापक और सलमान डॉक्टर हैं। सनोवर ने बताया कि आज जब मेरे माता-पिता देहरादून में आईएमए परिसर के पार्किंग में मुझे लेने आए तो मुझे लगा कि बचपन का मेरा सपना पूरा हो गया। सनोवर की पहली पोस्टिंग 9 गार्ड्स पठानकोट में हुई है। 

टेक्निकल एंट्री स्कीम से पाया मुकाम
रोहटा रोड स्थित शालीमार गार्डन निवासी आशीष शर्मा ने भी देश सेवा का मुकाम पा लिया। 2016 में आर्मी पब्लिक स्कूल से 93.2 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं पास करने वाले आशीष ने टेक्निकल एंट्री स्कीम से सेना में प्रवेश किया।

2016 में गया स्थित ऑफिसर ट्रेनिंग एकेडमी से बेसिक ट्रेनिंग करने के बाद कैडेट ट्रेनिंग विंग एमसीएमई सिकंद्राबाद पहुंचे। वह ईएमई कोर में लेफ्टिनेंट बने हैं। पिता संजीव शर्मा दिसंबर, 20 में सेना से सेवानिवृत्त हुए हैं। वहीं, माता सुषमा देवी गृहणी है। भाई अश्विनी शर्मा अध्यापक है। कोरोना के कारण आशीष को अवकाश नहीं मिला है।
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