जुनून ने बना दिया सिपाही से लेफ्टिनेंट
कंकरखेड़ा स्थित तुलसी कॉलोनी निवासी अनुराग राठौर ने बताया कि 2009 में आर्मी पब्लिक स्कूल से 63 प्रतिशत अंकों से बाहरवीं की परीक्षा पास की थी। 2013 में सेना में सिपाही बन गए और चार वर्ष तक इंजीनियर्स कोर में सेवा की। अधिकारी बनने का जुनून था।
आर्मी कैडेट कॉलेज से कमीशन होते हुए उन्हें लेफ्टिनेंट का पद मिल गया। उन्हें पहली पोस्टिंग गढ़वाल राइफल्स और कारगिल के द्रास सेक्टर में मिली है। पिता आरपी सिंह सेना से सेवानिवृत्त हैं और माता प्रतिला ठाकुर गृहणी हैं। छोटा भाई मानस राठौर सेना में ही जालंधर में सेवारत है।
बचपन से ही था देश सेवा का जज्बा
फाजलपुर स्थित सैनिक विहार निवासी सनोवर अहमद ने एपीएस आर्य पब्लिक स्कूल से 79 प्रतिशत अंक पाकर बारहवीं की परीक्षा पास की थी। वह एनडीए प्रवेश परीक्षा पास कर इस मुकाम तक पहुंचे। पिता इरशाद अहमद सेना से सेवानिवृत्त हैं। वहीं, माता फरीदा बेगम गृहणी हैं।
तीन भाई वसीम मेडिकल क्षेत्र, शाहिद अध्यापक और सलमान डॉक्टर हैं। सनोवर ने बताया कि आज जब मेरे माता-पिता देहरादून में आईएमए परिसर के पार्किंग में मुझे लेने आए तो मुझे लगा कि बचपन का मेरा सपना पूरा हो गया। सनोवर की पहली पोस्टिंग 9 गार्ड्स पठानकोट में हुई है।
टेक्निकल एंट्री स्कीम से पाया मुकाम
रोहटा रोड स्थित शालीमार गार्डन निवासी आशीष शर्मा ने भी देश सेवा का मुकाम पा लिया। 2016 में आर्मी पब्लिक स्कूल से 93.2 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं पास करने वाले आशीष ने टेक्निकल एंट्री स्कीम से सेना में प्रवेश किया।
2016 में गया स्थित ऑफिसर ट्रेनिंग एकेडमी से बेसिक ट्रेनिंग करने के बाद कैडेट ट्रेनिंग विंग एमसीएमई सिकंद्राबाद पहुंचे। वह ईएमई कोर में लेफ्टिनेंट बने हैं। पिता संजीव शर्मा दिसंबर, 20 में सेना से सेवानिवृत्त हुए हैं। वहीं, माता सुषमा देवी गृहणी है। भाई अश्विनी शर्मा अध्यापक है। कोरोना के कारण आशीष को अवकाश नहीं मिला है।