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अंग्रेजी माध्यम से पढ़ने वालों छात्रों को भूला बोर्ड, हिंदी माध्यम की एनसीईआरटी किताबें लागू कीं

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अंग्रेजी माध्यम से पढ़ने वालों छात्रों को भूला बोर्ड, हिंदी माध्यम की एनसीईआरटी किताबें लागू कीं
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मेरठ। यूपी बोर्ड ने एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू तो कर दिया है, लेकिन अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करने वाले जिले के कक्षा नौ से 12 तक के लगभग तीन हजार विद्यार्थियों को भूला हुआ है। बोर्ड ने सिर्फ हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों के लिए ही एनसीईआरटी की किताबें छपवाई हैं। ऐसे में अंग्रेजी माध्यम के छात्रों को निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों से पढ़ना पड़ रहा है।
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मेरठ में 22 स्कूल हैं, जिनमें अंग्रेजी माध्यम से भी यूपी बोर्ड के विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम यूपी बोर्ड की कक्षा 9 से 12 तक लागू किया गया था। बोर्ड ने अपने चार निर्धारित प्रकाशकों से एनसीईआरटी की किताबें छपवाई हैं। प्रकाशकों ने जिन विषयों की किताबें छापी हैं, वे सभी हिंदी माध्यम की हैं। बोर्ड ने अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों को किताबें उपलब्ध कराने के लिए न तो कोई प्रस्ताव तैयार कराया और न ही प्रकाशक तय किए हैं। यूपी बोर्ड विद्यालयों को मान्यता प्रदान करता है। स्कूल हिंदी माध्यम से पढ़ाएंगे या अंग्रेजी से इसकी मान्यता नहीं दी जाती। विभाग के पास न तो अंग्रेजी माध्यम से संचालित विद्यालयों का आंकड़ा है और न ही यहां पढ़ने वाले स्टूडेंट्स की सही स्थिति की जानकारी। बोर्ड फॉर्म भरवाने के समय विद्यार्थी से पूछा जाता है कि वह अंग्रेजी माध्यम से परीक्षा देना चाहता है या हिंदी से। उसी आधार पर छात्रों को प्रश्नपत्र मुहैया कराए जाते हैं। अंग्रेजी माध्यम के छात्र निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ने के लिए मजबूर हैं। एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम भले ही अंग्रेजी माध्यम में नहीं है, लेकिन निजी प्रकाशकों की किताबें अंग्रेजी माध्यम में उपलब्ध हैं। ऐसे में छात्र निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों से ही पढ़ने को विवश हैं। हिंदी माध्यम की किताबें 70 से 90 रुपये में हैं, वहीं अंग्रेजी माध्यम की 300 से 400 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक गिरजेश चौधरी ने बताया कि इस संबंध में बोर्ड की तरफ से ही निर्णय लिया जाना है। अंग्रेजी माध्यम के लिए अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
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