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विदेशी महिलाएं मेरठ में सीख रहीं विश्व शांति का पाठ

Mon, 22 Apr 2019 03:07 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ - फोटो : अमर उजाला
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विश्व को शांति और एकता का पाठ पढ़ाने के लिए विदेशी महिलाएं मेरठ में शिक्षा ग्रहण करने आ रही हैं। म्यांमार, भूटान सहित अन्य देशों के  युवा मेरठ आकर भगवान बुद्ध के संदेशों, प्रमुख वाक्यों को सीखने की ओर अग्रसर हैं। शहर के सुभारती स्कूल ऑफ बुद्धिस्ट स्टडी में विदेशी महिलाएं भगवान बुद्ध के ध्येय वाक्यों पर शोध क र उनके प्रचार-प्रसार की शिक्षा ले रही हैं।
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वर्तमान में सेंटर में चार युवतियां हैं। दिल्ली की दीपमाला, ग्रेटर नोएडा की अर्चना हैं। साथ ही म्यांमार की एकासारी और युतदुंगी भी इसी केंद्र से बुद्ध के जीवन व संदेशों की शिक्षा ले रही हैं। माता एकासारी और माता युतदुंगी दोनों ही म्यांमार से फैलोशिप में चयनित होकर भारत में बुद्धिज्म की शिक्षा के लिए आई हैं। दोनों ही स्टडी सेंटर में पीएचडी की शोधार्थी हैं। यहां से शिक्षा लेने के बाद ये दोनों माताएं अपने देशों में जाकर भगवान बुद्ध के संदेशों का प्रचार-प्रसार करेंगी। दोनों ही साधिकाओं को भारतीय संस्कृति, यहां के लोगों की धार्मिक सोच ने बहुत लुभाया।
16 साल की आयु में बनीं बौद्ध साधक
म्यांमार के मेक एरिया से यहां शिक्षा लेने आईं एकासारी 16 साल की आयु में मोंक (बौद्ध भिक्षुणी) बनीं। 39 वर्षीय एकासारी कहती हैं कि बचपन से परिवार में भगवान बुद्ध के बारे में सुनती रही। जैसे-जैसे समझ विकसित हुई मन गौतम बुद्ध के संदेशों में ही रम गया। 16 साल की आयु में जब 10वीं कक्षा में थी, तभी मैंने दीक्षा लेकर बौद्ध साधक का पथ चुन लिया। तभी से परिवार से अलग हूं और गौतम बुद्ध के संदेशों को प्रचारित कर रही हूं। भारत से बुद्धिज्म की शिक्षा लेने के बाद अपने देश जाकर वहां विद्यालयों में बच्चों को बुद्ध के संदेश सिखाऊंगी व उन्हें शिक्षित करूंगी। बुद्ध की राह पर बढ़ने का ही प्रण है जो अंतिम समय तक यथावत रहेगा।
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पाली लिखने, पढ़ने से विशेष लगाव
म्यांमार के सगायन एरिया से स्टडी सेंटर में पीएचडी रिसर्च वर्क के लिए आईं युतथुंगी 09 साल की आयु में मोंक बन गई थीं। युतथुंगी कहती हैं कि मेरे परिवार ने ही मुझे बुद्धिज्म की शिक्षा के लिए यहां भेजा है। पाली पढ़ना और लिखना विशेष तौर पर पसंद है। मोंक का जीवन सदैव त्याग और सेवा का संदेश देता है, यह जीवन मुझे अच्छा लगता है। यहां से शिक्षा लेकर अपने देश जाकर बच्चों को महात्मा बुद्ध के संदेशों की शिक्षा दूंगी, शिक्षित करूंगी। ताकि वो विश्वशांति के उसी पथ पर चलें जिस राह पर स्वयं महात्मा बुद्ध चले थे।
भारत से हुआ बौद्ध धर्म का प्रारंभ
एशियाई देशों सहित अन्य देशों में बुद्धिज्म की शिक्षा के लिए भारत को श्रेष्ठ केंद्र माना जाता है। बौद्ध के अनुयायियों में भारत देश के प्रति विशेष श्रद्धा है। भारत से ही बौद्ध धर्म का प्रारंभ हुआ था इसलिए भारतीय शिक्षा पद्धति को श्रेष्ठ माना गया है। विदेशी युवा भारत में ही बुद्धिज्म की उच्च शिक्षा के लिए आना चाहते हैं। सुभारती विवि के बुद्धिजम स्टडी सेंटर के अतिरिक्त दिल्ली विवि, नालंदा विवि, बौद्ध गया का मगध विवि, सांची विवि, नागपुर के आरटीएम विवि, सारनाथ में भी यह शिक्षा दी जा रही है। सुभारती विवि के बुद्धिजम स्टडी सेंटर में आगामी 27 अप्रैल को 33 लोग वियतनाम से आ रहे हैं। मेरठ से भी 12 सदस्यों का दल विशेष शिक्षा के लिए वियतनाम जा रहा है। बौद्ध अध्ययन विभाग के शोध पत्र हांगकांग में प्रस्तुत करेंगे। सुभारती विवि के बुद्धिज्म स्टडी सेंटर में एमए में 22, एमफिल में 30 और पीएचडी में 60 सीटें हैं।
भारत बुद्धिज्म की शिक्षा का बड़ा केंद्र
गौतम बुद्ध के अनुयायियों के लिए भारत बुद्धिज्म की शिक्षा का बड़ा केंद्र है। विदेशियों का मानना है कि भारत में ही भगवान बुद्ध के जीवन व संदेशों की सही शिक्षा मिल सकती है। एशियाई देशों में भारतीय शिक्षा पद्धति को श्रेष्ठ माना जाता है इसलिए विदेशी भारत में बुद्धिज्म की शिक्षा लेने वाले विदेशी विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। डॉ. हीरोहितो, सलाहकार सम्राट अशोक सुभारती स्कूल ऑफ बुद्धिस्ट स्टडी
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