- चित्रकला कार्यशाला में दिखा कला और संस्कृति का संगम
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। राज्य ललित कला अकादमी, उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग, विश्व नारी अभ्युदय संगठन (डब्ल्यूडब्ल्यूएओ) चैप्टर एवं ललित कला संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ग्रीष्मकालीन चित्रकला कार्यशाला में मंगलवार को कला, संस्कृति और सृजनात्मकता का अनूठा संगम देखने को मिला। कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में राज्य ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा पहुंचे।
डॉ. विश्वकर्मा ने कहा कि कला एक कलाकार की आत्मा होती है। भारतीय लोक कलाएं सांस्कृतिक चेतना की जीवंत पहचान हैं। कला केवल अभिव्यक्ति नहीं बल्कि समाज को जोड़ने वाली संवेदनशील शक्ति भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को निरंतर अभ्यास, सृजनशीलता और कला के प्रति समर्पण का संदेश दिया।
सीसीएसयू की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला के दिशा-निर्देशन और प्रो. अलका तिवारी के नेतृत्व में हुई कार्यशाला में डॉ. विश्वकर्मा ने विद्यार्थियों के बीच लाइव पेंटिंग डेमो प्रस्तुत किया। उन्होंने भारतीय कला-सौंदर्य पर आधारित पारंपरिक आध्यात्मिक चित्रण के माध्यम से विद्यार्थियों को रंग संयोजन, रेखांकन और भावाभिव्यक्ति की बारीकियों से अवगत कराया। कलाकार की तूलिका से कैनवास पर उभरते रंगों और भावों को देखकर विद्यार्थी हैरान रह गए।
कार्यशाला में विद्यार्थियों द्वारा तैयार मधुबनी, वर्ली, पेपर मेशी, सांझी, लिप्पन कला एवं पट चित्रों की प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही। पारंपरिक शैली में तैयार कलाकृतियों की अतिथियों ने सराहना की। इस दौरान प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र भी वितरित किए गए। वहीं, प्रशिक्षकों डॉ. प्रिंस राज, दीपांजलि और विनीता गुप्ता को पटका पहनाकर सम्मानित किया गया।
विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. दुर्जन सिंह राणा, प्रो. केके शर्मा एवं प्रो. जेए सिद्दीकी उपस्थित रहे। मंच संचालन डॉ. पूर्णिमा वशिष्ठ ने किया।आयोजन में डॉ. शालिनी, डॉ. रीता सिंह, दीपांजलि, कृतिका, शिल्पी शर्मा, शालिनी त्यागी, सुदेश कुमार एवं खालिद का विशेष योगदान रहा।