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पश्चिमी यूपी के कई शहरों में बाढ़ जैसे हालात, पीएसी के जवानों ने बचाई 24 जिंदगियां

Mon, 30 Jul 2018 10:38 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
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बाढ जैसे हालात - फोटो : अमर उजाला
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सहारनपुर में यमुना किनारे पलेज लगाकर अपने परिवार का पालन पोषण करने वाले 24 लोग अचानक यमुना में तेज पानी के बहाव में फंस गए। जलस्तर बढ़ने के कारण वे बाहर नहीं निकल पाए। इन लोगों की पूरी रात दहशत में ही गुजरी और ये एक ऊंचे टीले पर मदद की गुहार करते रहे। इनमें 12 बच्चे और अन्य महिला और पुरुष शामिल हैं। मूल रूप से गाजीपुर के सब्बलपुर निवासी ये लोग हर साल यमुना के रेतीले मैदान में सब्जियां उगाने के लिए आते हैं। पुलिस के आला अफसरों और पीएसी के सुरक्षा जवानों की मदद से रविवार सुबह सभी सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया।

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गांव घंघोड़ के पास यमुना नदी के खाली पड़े तट पर जिला गाजीपुर के कुछ लोगों ने सब्जी की पलेज लगाई थी। ये लोग वहीं पर निगरानी के लिए मौजूद रहे। शनिवार रात अचानक यमुना का पानी बढ़ गया और 24 लोग वहीं फंसे रह गए। एक ऊंचे टीले पर पहुंचकर मदद के लिए पुकार लगाते रहे। इस दौरान कुछ लोगों ने पुलिस को सूचित किया। रात में ही एसएसपी उपेंद्र कुमार अग्रवाल पुलिस फोर्स के साथ पहुंचे और हालात का जायजा लिया। पीएसी को भी बुलाया गया। लेकिन रात में अंधेरा अधिक होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं चल सका। इसके बाद सरसावा थाना प्रभारी देवेंद्र कुमार ने गांव में कैंप किया तथा उच्चाधिकारियों को स्थिति से अवगत कराते रहे।

बारिश का कहर - फोटो : अमर उजाला
रविवार को दिन निकलते ही पुलिस तथा पीएसी के जवानों ने रेस्क्यू शुरू कर दिया। नाव और रस्से तथा तैरने के उपकरण और जीवन सुरक्षा के अन्य सामान के साथ जवान इन लोगों के पास तक पहुंचे। ये लोग करीब 500 मीटर की दूरी पर एक ऊंचे टीले पर शरण लिए थे। बड़ी मशक्कत से उन्हें एक-एक कर सुरक्षित निकाला गया। इनमें 12 बच्चे और 12 महिला-पुरुष थे। गांव घंघोड़ पहुंचकर सभी को खाने-पीने का सामान दिया गया। इस आपरेशन से जान बचने पर अमित कुमार सहित अन्य लोगों ने बताया कि वे मूल रूप से गाजीपुर जिले रहने वाले हैं। हर साल यमुना नदी के रेतीले मैदानों पर सब्जियां उगाकर परिवार का गुजारा करते हैं। शनिवार का दिन उनकी जिंदगी का आखिरी दिन होता यदि ऊंचा टीले की शरण और सुरक्षा जवानों की मदद न मिलती। उन्होंने बचाव दल के प्रयासों पर आभार जताया। एसएसपी सहित सुरक्षा जवानों ने उन्हें चेतावनी भी दी कि यमुना के तेज बहाव के समय यहां आने का रिस्क न लें।

पीएसी ने रेस्क्यू आपरेशन से इन लोगों को बचाया
पुरूषों में अमित कुमार (30 वर्ष), उमेश कुमार (35 वर्ष), जोंगु (28 वर्ष), विद्यासागर (50 वर्ष), साहब कुमार (22 वर्ष), कमलेश (30 वर्ष),  महिलाओं में कमल (23 वर्ष) पत्नि अमित, सुराही (21 वर्ष) पत्नि जोंगु,  फुला (30 वर्ष) पत्नि उमेश, अंसुआ  (30 वर्ष) पत्नि कमलेश, रूसी  (45 वर्ष) पत्नी विद्यासागर, रेशमी (20 वर्ष) पत्नी साहब, बच्चों में विशाल ( 7 वर्ष), मुकेश  (13 वर्ष), बबलू  (10 वर्ष), काजल  (8 वर्ष), कृष्णा  (3 वर्ष), आकाश (9 वर्ष), पवन  (6 वर्ष), लालू  (5 वर्ष), गोलू  (3 वर्ष), मोनू  (7 माह), सोनम  (6 माह), सनिता  (1 वर्ष) को बचाया गया।

यमुना उफान पर, खेतों में पानी भरने से लाखों रुपये की फसल बर्बाद

नदी का जायजा लेते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
बागपत। पहाड़ों में चल रही बारिश और यमुना में अत्यधिक पानी छोड़ने के कारण यमुना उफान पर है। यमुना किनारे बसें गांवों में फिलहाल बाढ़ जैसे हालत बन गए है, क्योंकि अब तक सैकड़ों किसानों की लाखों रुपये की लागत की फसल जलमग्न हो गई है। वहीं यमुना में ओर अधिक पानी छोड़ने से किसान व ग्रामीण चिंतित हैं। प्रशासन ने भी अलर्ट जारी किया। गांव में कर्मचारियों को पल-पल की सूचना देने के निर्देश दिए हैं।

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में पिछले कई दिन से भारी बारिश हो रही है। इससे वहां गांवों तक में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। बारिश के चलते हथनी कुंड बैराज पर भी पानी का दबाव बन चला है, उसे बचाने के लिए यमुना में बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। यमुना नदी में बढ़ते जा रहे जलस्तर ने यमुना नदी किनारे कोताना, खेड़ी प्रधान, जागौस आदि सहित कई गांवों के लोगों की नींद उड़ा दी है। उन्हें बाढ़ के खतरे का डर सता रहा है।

चेतावनी - फोटो : अमर उजाला
बाढ़ के खतरें को देखकर रात में तो ग्रामीण चैन की नींद भी नहीं सो पा रहे हैं। यदि अब बात करें नुकसान की तो अब तक जागौस गांव में दर्जनों किसानों की लाखों रुपये की फसल जलमग्न होकर बर्बाद हो चुकी है। गांव के रामफल शर्मा की 10 बीघा ईख, तिलकराम की सात बीघा लौकी, हरा धनिया, करेला और मिर्च, राजन कश्यप का नौ बीघा करेला, विजयपाल कश्यप की पांच बीघा हरी मिर्च, सुरेश कश्यप की पांच बीघा ज्वार, धनिया, करेला और नरेश कश्यप की तीन बीघा धनिया की फसल बर्बाद हो चुकी है। सभी प्रशासन से मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
 
उधर, कोताना गांव की बात करें तो यहां पर रमेश सैनी की नौ बीघा मिर्च, धनिया, राकेश की सात बीघा ईख, विनोद कश्यप की चार बीघा ज्वार, हरि सिंह की चार बीघा लौकी और ज्वार की फसल भी जलमग्न होकर बर्बाद हो चुकी है। अब उन्हें यमुना के उफान से गांव में जान-माल की चिंता हो रही है। हालांकि यमुना में अत्यधिक पानी छोड़ने के बाद प्रशासन ने भी अलर्ट जारी किया। एसडीएम अरविंद कुमार द्विवेदी ने बताया कि यमुना किनारे बसें गांवों में तहसील व लेखपाल कर्मचारियों की टीम लगा रखी है, जो पल-पल की सूचना प्रशासन को दे रही है। लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है। फिलहाल अभी तक यमुना के पानी से अधिक नुकसान नहीं हुआ है।

अफजलगढ़ में बाढ़ जैसे हालात, लोगों में मचा हा हाकार

बारिश का कहर - फोटो : अमर उजाला
बिजनौर के अफजलगढ़ में दो दिन से हो रही बारिश के चलते नचना नदी में आए उफान से अफजलगढ़ नगर और इसके आसपास के गांवों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। बाढ़ का पानी लोगों के घरों और दुकानों में घुसने से उनका भारी नुकसान हो गया है। 

मेन बाजार, रामलीला मार्केट, सब्जी मंडी में तीन से चार फीट पानी भरा है। शनिवार रात हुई बारिश के कारण  कालागढ़ रोड बस स्टैंड जामा मस्जिद, मोहल्ला किला, चिरंजीलाल, गौहरअली खां बेगमसराय, जैनुलाबेदीन, मोहल्ला किला गड्ढा कॉलोनी, शिव मंदिर, सरकारी अस्पताल में कई फीट पानी के जमा होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सरकारी अस्पताल के अंदर भी डिस्पेंसरी, आपरेशन थियेटर, एक्सरे रूम, दवाघर और आवासीय कॉलोनी में पानी भरा है। राजकीय कन्या इंटर कॉलेज के समीप झोपड़ियों में रहने वाले विरान हो गए। इन लोगों ने झोपड़ियों से निकल कर सड़क पर पॉलिथीन डाल शरण ली। 

लोगों का कहना है कि उन्होंने एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, पालिका प्रशासन को अवगत कराया था कि नगर के बीच से गुजर रही नचना नदी पर अवैध निर्माण कर लिया गया है। वर्तमान में यह नदी नाले के आकार में आ गई है। जिससे पहाड़ों पर भारी बारिश होने से नदी में उफान आ जाता है और बाढ़ के हालात पैदा हो जाते हैं, लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।

अभी नहीं बाढ़ जैसे हालात : एक्सईएन

बारिश का कहर - फोटो : अमर उजाला
अफजलगढ़ सिंचाई खंड धामपुर के एक्सईएन रामबाबू का कहना है कि बारिश से अभी क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात कहीं नहीं हैं। खो नदी में 1.20 लाख क्यूसेक क्षमता के सापेक्ष केवल 43 हजार क्यूसेक पानी प्रवाहित हो रहा है। कालागढ़ डैम अभी खाली है। डैम की क्षमता 365 मीटर की है। पर अभी तक 227.700 मीटर तक ही पानी एकत्र हो सका है। हरिद्वार से गंगा में 80 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। जबकि बिजनौर बैराज से गंगा की क्षमता 6 लाख 50 हजार क्यूसेक के सापेक्ष केवल 1.20 लाख क्यूसेक पानी की गंगा में चल रहा है। दो दिन से हो रही बारिश के मद्देनजर उनके द्वारा निर्धारित बाढ़ निगरानी चौकियों का निरीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों, कर्मचारियों को अलर्ट रहने के लिए निर्देशित किया जा चुका है। 

नदी की जमीन को कब्जाने वालों पर होगी कार्रवाई : एसडीएम 
एसडीएम आलोक कुमार यादव का कहना है कि नदी की प्राकृतिक जमीन पर जिन लोगों ने कब्जा कर नाले का आकार देने का काम किया है। उनके कब्जे को हटाकर पूर्ववर्ती आकार में लाने का प्रयास होगा। आरोपियों पर कार्रवाई भी होगी। उन्होंने अफजलगढ़ क्षेत्र का दौरा कर बारिश से हुए नुकसान का जायजा लिया।
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यमुना में बाढ़ के बाद याद आई सहायक नदियां

बारिश का कहर - फोटो : अमर उजाला
वहीं लखनौती में यमुना नदी की सहायक नदियों का अतिक्रमण के कारण अस्तित्व समाप्त होने की तरफ है। इस बार यमुना में आई बाढ़ से खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद होने के बाद ग्रामीणों को अब इनकी याद आ रही है। ग्रामीणों ने क्षेत्र से गुजरने वाली दोनों सहायक नदियों की निशानदेही कराकर उन्हें अपने स्थान पर कायम कर खोदाई कराने की मांग की है।

तहसील नकुड़ के गांव लखनौती से होकर गुजरने वाली दो नदियां सिंधली और बूढ़ी यमुना नदी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही हैं। हालत यह है कि जहां जहां से सड़क गुजर रही है, वहां केवल पुल के पास ही इन नदियों के निशान बचे है। अन्यथा गांवों और जंगलों में नदियों का अस्तित्व ही खत्म हो गया है। गांव के 90 वर्षीय मसता, अजहर अब्बास, लालू खान, जनेश्वर आदि  कहना है कि सिंधली नदी और बूढ़ी यमुना नदी यमुना नदी की सहायक नदियां थी। ये सरसावा, चिलकाना, नकुड़ क्षेत्र से शुरू होकर शामली क्षेत्र में जाकर यमुना नदी में मिल जाती थी। ये नदियां चिलकाना, सरसावा, नकुड़, लखनौती आदि क्षेत्र के बारिश का पानी और बाढ़ का अतिरिक्त पानी अपने अंदर समा लेती थी। पिछले कई सालों में बारिश कम होने के कारण इन नदियों का आवश्यकता ही नहीं पड़ी जिस कारण किसानों ने अतिक्रमण करके इन नदियों में खेती करनी आरंभ कर दी।  
तीन दिन से लगातार हुई बारिश के बाद लुप्त हुई ये नदियां फिर से याद आ गई हैं। खालिद, आजम, नाथीराम, पूना, अमित कुमार आदि ग्रामीणों ने दोनों नदियों की खोदाई कराने की मांग है, ताकि यमुना नदी का पानी ओवर फ्लो होकर खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान करने की बजाए इन नदियों में समा जाए। एसडीएम नकुड़ युगराज सिंह का कहना है कि जल्द ही राजस्व टीमें भेज कर नदियों की निशानदेही करा इनकी खोदाई का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।

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