जानीखुर्द। भोला की झाल स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की सफाई का कार्य एक माह बाद भी अधूरा है। इस पर अपर नगर आयुक्त के शनिवार को निरीक्षण के दौरान नाराजगी जताई। प्लांट की अभी तक महज 40 फीसदी सफाई हो सही है। जिसके चलते अभी तक गंगाजल की सप्लाई नहीं हो सकी है। वहीं, अपर नगर आयुक्त ने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की देखरेख करने वाली कंपनी के अधिकारियों को सोमवार को तलब किया है।
भोला की झोल स्थित नगर निगम के 100 एमएलडी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का संचालन और रखरखाव जल निगम की नागर कार्य इकाई के जिम्मे है। नागर कार्य इकाई यह कार्य आउटसोर्स फर्म टीएल इंफ्रा के माध्यम से कराती है। नगर निगम इसके लिए हर तिमाही 81.50 लाख रुपये का भुगतान करता है। इस वर्ष एक माह के लिए गंगनहर बंद होने के बाद फिर से चालू कर दी गई है। इसके बावजूद प्लांट की सफाई अधूरी है। अपर नगर आयुक्त श्रद्धा शांडिल्यायन को निरीक्षण के दौरान प्लांट गंगाजल आपूर्ति लायक स्थिति में नहीं मिला। इस पर उन्होंने सोमवार को ठेकेदार और कार्यदायी संस्था जल निगम नागर इकाई के परियोजना प्रबंधक को अनुबंध पत्र के साथ तलब किया है। प्लांट के निरीक्षण के दौरान पुताई का काम अधूरा मिला। वहीं, मशीनों और मोटरों की ग्रीसिंग नहीं हुई। सीडब्लू प्लांट में लिकेज मिला। प्लांट की बिल्डिंग में जगह-जगह गंदगी और दरारें मिलीं। इस दौरान अपर नगर आयुक्त श्रद्धा शांडिल्यायन के साथ सहायक नगर आयुक्त ब्रजपाल सिंह, महाप्रबंधक जल रतनलाल, अधिशासी अभियंता जल निगम यांत्रिकी अमित सहरावत भी रहे।
नगर निगम को राजस्व का नुकसान
भोला झाल स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को गंगनहर में पानी आने के दो दिन बाद शुरू होना था। गंगनहर में छह दिन पूर्व पानी आ चुका है परंतु प्लांट की सफाई अधूरी है। वहीं, नगर निगम नलकूपों से महानगरवासियों को जल की आपूर्ति कर रहा है। जिसके चलते नगर निगम को प्रतिदिन लाखों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। वहीं, नलकूपों के जरिए भूजल दोहन किया जा रहा है।