स्मार्ट सिटी का सपना सच होगा या फिर उसके नाम पर केवल राजनीति ही होती रहेगी। मई माह में जारी होने वाली स्मार्ट सिटी का सूची का कहीं अता-पता नहीं है। यूपी में भाजपा सरकार आने के बाद अब स्थानीय भाजपा नेताओं के पास भी यह बहाना नहीं बचा कि यूपी सरकार इसमें अड़ंगा लगा रही है। स्मार्ट सिटी के बिंदुओं पर शहर में भी कोई काम नहीं हो रहा है।
जोरों पर थी तैयारी
नगर निगम ने 31 मार्च को स्मार्ट सिटी का प्रोजेक्ट तैयार करके केंद्र सरकार को सौंप दिया था। केंद्र सरकार ने इसे स्वीकार भी कर लिया था। स्मार्ट शहरों का मूल्यांकन करने के लिए समिति का गठन भी किया था। यह भी बताया जा रहा था कि मई माह के अंतिम सप्ताह में देश के स्मार्ट शहरों के नामों की घोषणा की जाएगी। अब तो जून का प्रथम सप्ताह भी बीत चुका है। लेकिन केंद्र सरकार की तरफ से स्मार्ट सिटी को लेकर कोई हलचल नहीं दिखाई दे रही है।
कहां गया करोड़ों का प्रपोजल
स्मार्ट सिटी की अंतिम परीक्षा में पास होने के लिए नगर निगम प्रशासन और कंसलटेंट द्वारा तैयार किया गया फाइनल प्रपोजल 2912.69 करोड़ रुपये का तैयार किया गया था। जिससे पूरा शहर चकाचक हो जाएगा। रीजनल सेंटर फॉर अर्बन एंड एनवायरमेंटल स्टडीज के अपर निदेशक अवधेश कुमार गुप्ता सहित पूरी टीम ने मेरठ प्रपोजल को मजबूत बताया था।
जनता ने दिया पूरा साथ
स्मार्ट सिटी के लिए वोटिंग और जागरूकता के लिए शहर की जनता, सामाजिक संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों ने एकजुट होकर कार्य किया था। सभी को पूरी उम्मीद है कि इस बार मेरठ का नाम स्मार्ट शहरों की सूची में शामिल होगा। लखनऊ में मेरठ के स्मार्ट सिटी प्रपोजल को सराहा ही नहीं गया बल्कि अन्य शहरों के लिए नजीर भी बताया गया था। जिससे साफ जाहिर हो रहा है कि मेरठ की जनता शहर को स्मार्ट देखना चाहती है।
मेरठ का नहीं मुकाबला
हम केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय से जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। वैसे भी मेरठ का नाम स्मार्ट शहरों की सूची में आना निश्चित है। क्योंकि यूपी का कोई शहर ऐसा नहीं, जो मेरठ का मुकाबला कर सके। हमें पूरी उम्मीद है कि इस बार मेरठ का नाम स्मार्ट शहरों में होगा। -हरिकांत अहलूवालिया, महापौर