मुजफ्फरनगर में फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) लेने और उसे आगे पास करने के मामले में पूर्व सांसद कादिर राना, पूर्व विधायक शाहनवाज राना और पूर्व विधायक नूर सलीम प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रडार पर आ गए।
मुजफ्फरनगर में पूर्व विधायक शाहनवाज राना के बेटे शाह आजम राना की जम्बूद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इंपोर्ट्स लिमिटेड का विवादों से पुराना नाता है। कानपुर में राना एग्रीकल्चर के नाम से पंजीकृत हुए फैक्टरी का नाम 2017 में बदला गया। वर्ष 2018–2019 में पहली बार जांच शुरू हुई और इसके बाद मुसीबत बढ़ती चली गई।
विज्ञापन
पूर्व विधायक राना ने बोर्ड से 2012 में त्यागपत्र देने का दावा किया। संबंधित इकाई पर बिना माल की वास्तविक आवाजाही के फर्जी चालान और ई-वे बिल तैयार कर फर्जी आईटीसी बनाने और उसे आगे पास करने का आरोप है।
जीएसटी अधिकारियों की जांच में 9.63 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट कथित तौर पर गलत तरीके से हासिल करने और 10.28 करोड़ रुपये का आईटीसी आगे पास करने की बात सामने आई थी। पूरे मामले की जांच प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत की जा रही है।
विज्ञापन
24 साल पुरानी फैक्टरी
राना एग्रीकल्चर के नाम से चार सितंबर 2002 को कानपुर में पंजीकरण गया। कंपनी का नाम परिवर्तित कर जम्बूद्वीप एक्सपोर्ट 29 अगस्त 2017 को रखा गया। पूर्व विधायक शाहनवाज राना ने एक जनवरी 2012 को बोर्ड से त्यागपत्र दिया था।
दो साल पहले यह दर्ज हुआ था मामला
जीएसटी की ओर से वादी प्रद्युम्न चौधरी ने आठ दिसंबर 2024 फैक्टरी के खिलाफ कूटरचित दस्तावेजों का प्रयोग करने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। जांच के दौरान न्यू यूपी उत्तरांचल टीपीटी कंपनी रामपुर चुंगी, अयान रोड लाइंस राणा चौक बायपास , हरियाणा महाराष्ट्र फ्रेट कैरियर, वेदांशु रोड कैरियर की बिल्टी दिखाई गई लेकिन यह अस्तित्व में नहीं मिली।
कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर आईटीसी क्लेम किया गया है, जिससे सरकारी राजस्व को हानि पहुंची है। पूर्व विधायक शाहनवाज राना के बेटे कंपनी के डायरेक्टर शाह आजम राना, डायरेक्टर जिया अब्बास जैदी व तौसीफ कुरेशी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बाद में पुलिस ने जांच में पूर्व विधायक को भी आरोपी बनाया गया और गैंगस्टर की कार्रवाई भी की गई थी।
रडार पर राना हाउस, मुजफ्फरनगर में सात ठिकानों पर तलाशी
मुजफ्फरनगर में फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) लेने और उसे आगे पास करने के मामले में पूर्व सांसद कादिर राना, पूर्व विधायक शाहनवाज राना और पूर्व विधायक नूर सलीम प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रडार पर आ गए। लखनऊ के जोनल कार्यालय की टीम ने राना परिवार के कार्यालयों और प्रतिष्ठानों पर तलाशी ली। इसके अलावा रोलिंग मिल मालिक पूर्व चेयरमैन अनिल तायल, संजय जैन, आकाश कुमार के ठिकानों पर पहुंचकर सत्यापन किया।
पूर्व विधायक शाहनवाज राना की जम्बूद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इंपोर्ट्स लिमिटेड से जुड़े मामले में राना हाउस में सोमवार तड़के सवा पांच बजे टीम पहुंची। इकाई पर बिना माल की वास्तविक आवाजाही के फर्जी चालान और ई-वे बिल तैयार कर फर्जी आईटीसी बनाने और उसे आगे पास करने का आरोप है।
अर्धसैनिक बलों की सुरक्षा के बीच टीम ने दस्तावेजों और अन्य संबंधित रिकॉर्ड की जांच की। ईडी की टीम का केंद्र राना हाउस रहा। टीम ने शाहनवाज राना के सीए से भी जानकारी ली है।
इसके अलावा टीमों ने पालिका के पूर्व चेयरमैन अनिल तायल के नई मंडी और द्वारिका पुरी, उद्यमी संजय जैन के प्रेमपुरी आवास पर भी प्रपत्रों का सत्यापन किया और बयान लिए। परिवार के सदस्यों से अलग-अलग जानकारी ली गई। उद्यमी आकाश के जानसठ रोड स्थित ड्रीम सिटी आवास पर भी टीम देर शाम तक डेरा डाले रही।
राना हाउस पर इसलिए बढ़ाई गई सख्ती
जम्बूद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इंपोर्ट्स लिमिटेड में जीएसटी अधिकारियों की जांच में 9.63 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट कथित तौर पर गलत तरीके से हासिल करने और 10.28 करोड़ रुपये का आईटीसी आगे पास करने की बात सामने आ चुकी है।
अवैध तरीके से हासिल की गई यह रकम प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत अपराध से हुई कमाई के दायरे में आती है। ईडी अब फर्जी कंपनियों के नेटवर्क, लेनदेन की कड़ियां खंगाल रही है।