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फिर सक्रिय हो गये खनन माफिया

Tue, 12 Jun 2018 12:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार बनते ही सबसे पहले खनन माफिया पर शिकंजा कसने की बात कही थी। इसका असर भी नजर आया। लेकिन यूपी सरकार का एक साल पूरा होते-होते पुलिस प्रशासन ने मुख्यमंत्री के आदेश को पूरी तरह दरकिनार कर दिया। हालात यह है कि खनन माफिया फिर से सक्रिय हो गए हैं। नियमों की आड़ में जमकर खनन हो रहा है। खेतों को तालाब और गहरी खाई में तब्दील किया जा रहा है। 
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ये है खनन के नियम 
सरकारी आदेश के अनुसार मिट्टी खनन की अनुमति सरकारी विकास कार्य, स्वीकृत मानचित्र के अनुसार बेसमेंट की खुदाई, पर्यावरण विभाग से स्वच्छता प्रमाण पत्र लेने वार्ले इंट भट्टों के साथ ही उन किसानों को अपने खेत से मात्र 10 ट्राली मिट्टी खनन की अनुमति है, जो अपने खेत को समतल करना चाहते हैं। इन किसानों को इस मिट्टी का उपयोग अपने ही निजी काम में करना होगा। 

हो क्या रहा है 
इस समय मिट्टी खनन जोरों पर है। इसका उपयोग निजी कालोनियों और प्लाटों में भराव के लिए सबसे ज्यादा हो रहा है। इस खनन में दो तरह का खेल है। पहले खेल में खनन करने वाले सरकारी विकास कार्य का ठेका लेते हैं। खनन की अनुमति के साथ निश्चित खनन से कहीं ज्यादा खनन कर मिट्टी को प्राइवेट कामों के लिए महंगे दामों पर बेच रहे हैं। इसके अलावा किसानों के 10 ट्रैक्टर-ट्राली के नियमों की आड़ में खेल हो रहा है। खनन माफिया खेतों से मिट्टी उठाते यदि पकड़े जाते हैं तो खनन विभाग की सेटिंग से उसे निजी काम के लिए खेत से मिट्टी उठाना दर्शाकर बच निकलते हैं।  
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यहां चल रहा है धड़ल्ले से खनन 
जनपद में यूं तो दौराला, कंकरखेड़ा, पल्लवपुरम, इंचौली, गंगानगर, भावनपुर और मुंडाली थाना क्षेत्र में सबसे ज्यादा खनन होता रहा है। लेकिन इस समय अमर उजाला की पड़ताल में भावनपुर और मुंडाली थाना क्षेत्र में सबसे ज्यादा खनन हो रहा है। भावनपुर थाना क्षेत्र में नंगला साहू, मेदपुर, गांवड़ी आदि के जंगल में कई खेत तालाब नहीं बल्कि गहरी झील बने नजर आते हैं। 

खनन विभाग और पुलिस की है सेटिंग 
अवैध खनन में खनन विभाग और पुलिस की सेटिंग होती है। भावनपुर थाना क्षेत्र में तो पिछले दिनों एक मामला ऐसा भी सामने आया, जब पुलिस ने एक ट्रैक्टर-ट्राली को मिट्टी के साथ पकड़ा और खनन विभाग के एक अधिकारी ने उसके पक्ष में पैरवी कर दी। इस कारण पुलिस को अवैध मिट्टी खनन नहीं बल्कि मोटर व्हीकल एक्ट में ट्रैक्टर-ट्राली का चालान करना पड़ा। 
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