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मेरठ में अंग्रेजों ने तलाशी पुरखों की कब्रें

Wed, 30 Sep 2015 02:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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आठ साल बाद फिर अंग्रेजों का दल अपने पुरखों की कब्र खोजने क्रांति के उद्गम स्थल पर पहुंचा। लेकिन इस बार वह भूल नहीं की, जिसके चलते उन्हें भारी विरोध के चलते लौटना पड़ा था। इसी दल ने उस समय लेखानगर कब्रिस्तान में विवादित शिलापट लगाने की कोशिश की थी। हालांकि इस बार दल ने पांच पुरखों की कब्र पहचानने का दावा किया है।
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फैमिली इन ब्रिटिश इंडिया सोसायटी (एफआईबीआईएस) के तत्वावधान में यह 15 सदस्यीय दल मंगलवार को दिल्ली से मेरठ पहुंचा। इस टीम का नेतृत्व इंग्लैंड निवासी एलेनी कर रही थीं। उन्होंने बताया कि करीब नौ महीने की मशक्कत के बाद इस 15 सदस्यीय टीम का चयन हो पाया। इन सदस्यों के पुरखों की कब्र कहां हैं, आज तक इसकी कोई पहचान नहीं हो पाई। न ही यह पता लग पाया कि इन पुरखों की मृत्यु कब और कैसे हुई।

टीम ने मंगलवार को शहर में आरसी चर्च, सेंट जोंस चर्च और लेखानगर स्थित कब्रिस्तान में पूछताछ करते हुए अपने पुरखों की कब्रों की पहचान करने का प्रयास किया। एलेनी ने बताया कि वह अपनी पूर्वजों की छठी पीढ़ी से है। वे यहां अपने पूर्वजों में ‘लिंच’ जोकि इंग्लैंड की फौज में कार्यरत थे और उनके पुत्र जेम्स ग्रीवर की कब्रों को खोजने आई हैं। इस सोसायटी से जुड़े सदस्य अनुराग ने बताया कि कुछ सदस्यों के पुरखों की कब्र पहचानी गयी है वहीं, एलेनी ने कहा कि पांच पूर्वजों की कब्र की पहचान हुई है। उनका कहना है कि वे भारत में 28 दिन के टूर पर हैं। मेरठ के अलावा अमृतसर, आगरा, धर्मशाला भी जाएंगे। शहर में भ्रमण के दौरान उन्होंने आबूलेन, सदर और लालकुर्ती आदि स्थानों की फोटोग्राफी भी की।
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इन पुरखों की कब्रों की खोज होनी थी
सोसायटी के एक अन्य सदस्य वेलमे वाई ने बताया कि उन्होंने अपने पूर्वज होल्ड-वे और नोरमन की खोज का प्रयास किया वहीं, पेनी एस ने बताया कि उन्होंने अपने पूर्वज जॉन जोजफ होल्ड-वे की कब्र खोजी। वहीं, एलसी लिंडा ने फेलेक्स फ्रेंक ऐंबुरे और थामस इजरा ऐंबुरे की कब्र खोजी। जी नोएल ने भी अपने पुरखों की कब्र खोजी।

इनकी हुई पहचान
टीम लीडर एलेनी ने बताया कि ब्राउन एलीएनार, मॉरिस जेम्स, शिआ जीवीमाह, ब्लैंक थॉमस और ग्रीन वुड जॉजफ की कब्रों की पहचान हुई है। ये किसके पुरखे हैं, इस बारे में उन्होंने बताने से इंकार कर दिया।

क्रांतिधरा का इतिहास जाना  
होटल क्रिस्टल पैलेस में डॉ. अमित पाठक ने पंद्रह सदस्यीय दल को प्रोजेक्टर के जरिये क्रांतिधरा के इतिहास से अवगत कराया। अमित पाठक ने शहर के 200 वर्ष पुराने इतिहास में 1857 की क्रांति के कारण, आवश्यकताओं के साथ परिणाम के विषय में बताया। किस प्रकार भारतीय मूल के सैनिकों चर्बी युक्त कारतूसों का विरोध किया। सदर, लालकुर्ती के साथ आबू के मकबरा, बेगम समरू महल के चित्र भी दिखाए। अंग्रेजी शासन काल में छावनी की प्रमुख इमारतों की तस्वीर और आज भारतीयों ने उन्हें किस तरह संजोए रखा है, यह भी दिखाया गया।

आठ साल पहले हुआ था भारी विरोध
इस दल के कुछ सदस्य वर्ष 2007 में भी मेरठ में आए थे। यहां छावनी स्थित चर्च में एक विवादित शिलापट लगाने के प्रयास को लेकर विवाद हो गया था। शिलापट पर क्रांति को लेकर विवादित शब्दों का प्रयोग किया गया था। इसको लेकर जन प्रतिनिधियों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था। हंगामे के चलते इस सदस्यों को शिलापट लेकर वापस विदेशी दूतावास लौटना पड़ा था। इस संबंध में जब एलेनी से पूछा गया तो उनका कहना था कि उनके साथ कुछ अन्य सदस्य वर्ष 2007 में भी मेरठ आए थे। हालांकि शिलापट को लेकर जो हुआ, उसके बारे में कुछ भी कहने से एलेनी ने इंकार कर दिया।
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