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Meerut News: वोट देने में सबसे पीछे कैंट के मतदाता

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वोट देने में सबसे पीछे कैंट के मतदाता
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ।
मतदान के मामले में मेरठ में कैंट के मतदाता सबसे पीछे रहते हैं। बात 2019 के लोकसभा चुनाव की हो या फिर 2022 के विधान सभा चुनाव की। दोनों ही चुनावों में यहां का मतदान प्रतिशत 60 भी नहीं पहुंच सका। कैंट एरिया में रहने वाले मतदाता हमेशा से उदासीन रहे हैं। इससे पहले के चुनावों में भी इस विधानसभा क्षेत्र में कम ही मतदान होता रहा है। चुनाव आयोग के सामने यह चुनौती होगी कि मेरठ में अधिक से अधिक मतदाताओं को निकाल कर किस तरह से बूथ तक ले आएं।
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मेरठ कैंट में 2022 के विधानसभा चुनाव में 58.59 प्रतिशत मतदान हुआ था। जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव में यह प्रतिशत 59.47 था। आम-तौर पर विधानसभा के मुकाबले लोकसभा चुनाव में मतदान कम होता है। लेकिन मेरठ के अधिकतर विधान सभा क्षेत्र की अधिकतर सीटों पर लोकसभा के चुनाव में मतों का प्रतिशत विधानसभा के चुनावों से अधिक रहा था। मतदान करने के मामले में किठौर के मतदाता शहरी मतदाता से अधिक जागरुक रहे हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में लगभग 70 प्रतिशत मतदान हुआ था। जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में मतों का प्रतिशत 66.36 था। ऐसा ही कुछ हाल मेरठ दक्षिण विधानसभा का भी था। यहां 2022 में 61.52 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। 2019 में मतदान का प्रतिशत 62.72 था। शहर में मतदान का प्रतिशत लगभग 2019 और 2022 के चुनाव में बराबर ही रहा। विधानसभा चुनावों में यहां 64.25 प्रतिशत मतदान हुआ था जबकि 2019 के लोक सभा चुनाव में यह प्रतिशत 64.11 था। मेरठ जिले में एक और विधानसभा सीट है जहां कल वोट डाले जाएंगे। यह सीट है सिवालखास। सिवालखास बागपत लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र की विधानसभा सीट है। इस सीट पर 2022 के विधानसभा चुनाव में 65.69 प्रतिशत मतदान हुआ था। वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में यह प्रतिशत 68.45 था। इसी तरह एक और विधानसभा सीट है हापुड़। हापुड़ मेरठ लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में आता है। यहां भी 2022 के चुनाव में 62.32 प्रतिशत था जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव में 65.90 प्रतिशत मतदान हुआ था।
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