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फेडरेशन ने साजिश के तहत नहीं भेजा : अंकुश पूनिया

Sat, 06 Aug 2016 02:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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 रियो में खेलों का महाकुंभ शुक्रवार से शुरू हो गया है। एशियन गेम्स में देश को गोल्ड मेडल दिलाने वाले डिस्कस थ्रो खिलाड़ी सीमा पूनिया भी अपने इवेंट में हिस्सा लेने को तैयार हैं। खास बात यह है कि इस बार सीमा बिना पति एवं कोच के ही मैदान में हैं। फेडरेशन ने उन्हें रियो जाने की अनुमति नहीं दी। अमर उजाला से विशेष बातचीत में अंकुश पूनिया का दर्द छलक गया। रियो न जाने पर उन्होंने इंडियन एथलेटिक्स फेडरेशन की साजिश बताया। पेश हैं उनसे बातचीत के कुछ विशेष अंश।
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सवाल : रियो ओलंपिक में आपको सीमा के साथ नहीं भेजा गया, इसके पीछे क्या कारण है?
जवाब : रियो न जा पाने का मलाल जिंदगी भर रहेगा। सबसे बड़े टूर्नामेंट मेें सीमा का कोच और पति साथ न हो तो दुख तो होता है। मुझे साजिश के तहत नहीं भेजा गया। फेडरेशन ने ऐसा किया है। क्योंकि पहली दो लिस्ट में मेरा नाम था, तीसरी में काटा गया है।

सवाल : आपने फेडरेशन से रियो न भेजने का कारण पूछा।
जवाब : दूसरी लिस्ट में मेरा नाम 16वें नंबर पर था। लेकिन फेडरेशन ने 21वें नंबर वाले कोच को भेज दिया। यह सब टाइम टू टाइम किया गया। फेडरेशन ने कोई कारण नहीं बताया। समय न मिलने के कारण मैं पूछ भी नहीं सका।
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सवाल : सीमा पूनिया की रियो में बिना कोच के कैसे प्रैक्टिस होगी?
जवाब : ऐसा पहली बार हो रहा है कि सीमा बिना कोच के वर्ल्ड के सबसे बड़े टूर्नामेंट में हिस्सा ले रही हैं। हालांकि टीम के साथ अन्य कोच हैं। वे उनकी तैयारी कराएंगे।

सवाल : ओलंपिक के लिए सीमा ने छह माह विदेश में तैयारी की है। आप भी उनके साथ थे, इस समय आपको साथ होना चाहिए था।
जवाब : सीमा को में बहुत ही नजदीकी से जानता हूं। हम दोनों ने विदेश में रहकर 8 से 10 घंटे तक प्रैक्टिस की है। पहले अमेरिका और फिर रूस। तकनीक और फिटनेस पर खासा फोकस किया है। मैं उनके साथ जाना चाहता था, लेकिन चाहकर भी नहीं जा सका।

सवाल : कॉमनवेल्थ, एशियन गेम्स में आप सीमा के साथ थे। दोनों मेडल मिल गए। अब क्या उम्मीद है?
उत्तर- कॉमनवेल्थ गेम्स में सीमा ने तीन थ्रो पहले फाउल कर दिए थे। फिर उसे बताया और समझाया। उसके बाद उसने शानदार प्रदर्शन कर मेडल जीता। एशियन गेम्स में भी ऐसा ही हुआ। लेकिन मुझे इस बार भी भरोसा है कि सीमा पदक जरूर जीतेंगी।

सवाल : पूरे देश को सीमा से गोल्ड की आस है। सवा सौ करोड़ जनता का दबाव भी है।
उत्तर - पूरे देश पर रियो ओलंपिक का बुखार चढ़ गया है। सीमा क्रांतिकारी शहर की बहू हैं। पहले भी उसने एशियन गेम्स में गोल्ड दिलाया है। वह सवा सौ करोड़ भारतीयों की उम्मीद नहीं तोड़ेगी। हमने प्रैक्टिस के दौरान दबाव कम करने पर भी काम किया था।
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