हिंदुस्तान में रहना है तो वंदेमातरम कहना होगा, हिंदुस्तान में रहेंगे, लेकिन अल्लाह हू अकबर कहेंगे। इन दोनों नारों से शुरु हुई जंग अब दिल्ली तक पहुंच गई है। दो दिन पहले मेरठ में नगर निगम की बोर्ड बैठक में वंदेमातरम को लेकर विवाद हुआ। इस दौरान विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों ही पक्ष आमने-सामने आ गए। अब डर है कि मेरठ में कहीं सांप्रदायिक तनाव न हो जाए ? क्योंकि जहां एक ओर हिंदू संगठन के लोग इस बात पर अड़े हुए है कि सदन में तभी बैठने देंगे जब वंदेमातरम कहेंगे। लेकिन दूसरे समुदाय के लोगों का कहना है कि वंदेमातरम को हमारा मजहब स्वीकार नहीं करता है। इसलिए हम सदस्यता से तो इस्तीफा दे सकते हैं। लेकिन वंदेमातरम नहीं गाएंगे। इतना ही बल्कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट जाने का भी ऐलान कर दिया है।
दरअसल, मंगलवार को नगर निगम की बोर्ड बैठक में मंगलवार को विपक्षी पार्षदों द्वारा वंदेमातरम गायन का बहिष्कार करने को लेकर जमकर बखेड़ा हुआ था। महापौर ने वंदेमातरम का विरोध करने वाले पार्षदों की सदस्यता समाप्त करने और ऐसे सदस्यों को सदन में न बैठने देने का प्रस्ताव रखा, जिसे भाजपा के सभी सदस्यों ने पास कर दिया था। जिसके बाद विपक्षी पार्षदों ने सदन छोड़ दिया था। यह विवाद बुधवार को और गरमा गया। महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने कहा कि हम वंदेमातरम का अपमान नहीं सहेंगे। इसके लिए हम नगर निगम की बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास कर चुके हैँ। हम अपने निर्णय से पीछे नहीं हटेंगे। इसके लिए भले ही क्यों न जेल जाना पड़े। उन्होंने कहा कि सपा को छोड़ अन्य सभी दलों के पार्षद वंदे मातरम को लेकर गंभीर हैं। अगली बोर्ड बैठक में केवल वही पार्षद सदन में बैठेगा, जो वंदेमातरम बोलेगा।