खाद्य एवं औषधि सुरक्षा विभाग में बिल्डिंग रेनोवेशन घोटाले के बाद अब मलबे का खेल सामने आ रहा है। रेनोवेशन के दौरान पुरानी बिल्डिंग से जो लाखों रुपये का मलबा निकला, उसे बिना किसी नीलामी प्रक्रिया के बेच दिया गया। अधिकारी अब इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।
मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित एफडीए बिल्डिंग के रेनोवेशन के काम में कार्यदायी संस्था द्वारा भारी घपले का मामला सामने आया था। करीब डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का काम लेने के बाद भी लैब में रेनोवेशन के नाम पर 8-10 शौचालय ही बनाए गए हैं। रेनोवेशन के दौरान एफडीए बिल्डिंग में स्थित पुराने लैब की अलमारी तोड़ने से लेकर लकड़ी की अलमारियों का बाहर निकाल दिया गया था। क्योंकि नई व्यवस्था के तहत लैब को अत्याधुनिक बनाया जा रहा है। जिसमें सेंट्रल एसी तक की सुविधा देने की बात कही जा रही है। जिसके चलते छोटे-छोटे कमरों को तोड़कर बड़ा हॉल बनाया गया है।
इन कमरों को तोड़ने के दौरान सरिया व भारी मात्रा में लकड़ी का सामान निकाला गया था। लंबे समय तक यह मलबा एफडीए बिल्डिंग के बाहर व छत पर पड़ा रहा। लेकिन बीते एक सप्ताह में इस मलबे को रातोंरात उठवा दिया गया। अब विभागीय अधिकारी सारे मामले में प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं। सहायक आयुक्त औषधि राजेश श्रीवास्तव का कहना है कि रेनोवेशन का काम उनके आने से पहले शुरू हुआ था। जिस कारण से उन्हें टेंडर की शर्तों का पता नहीं है। अगर मलबा बिना किसी नीलामी प्रक्रिया के उठाया गया है तो उस पर एक्शन लिया जाएगा। लेकिन यह सब सारी फाइलों को देखने के बाद ही सामने आ सकेगा।
यूं उठ रहे सवाल
दरअसल नियम के तहत मलबे के तौर पर लोहा या लकड़ी का कोई सामान निकलता है तो उसे बेचे जाने की एक प्रक्रिया होती है। जिसके लिए या तो नीलामी प्रक्रिया अपनानी होती है या फिर मुख्यालय स्तर से स्वीकृति लेकर बेच दिया जाता है। लेकिन यहां पर किसी भी प्रक्रिया को नहीं अपनाया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिरकार एक साल से पड़ा मलबा कैसे अचानक से गायब हो गया। हालांकि विभाग के ही कुछ लोग कह रहे हैं कि गंदगी ज्यादा हो रही थी, जिस कारण से उसे बिना नीलामी प्रक्रिया के उठवा दिया गया। क्योंकि सरकारी सिस्टम में नीलामी की प्रक्रिया भी काफी लंबे है। जिसकी स्वीकृति लेना इतना आसान नहीं है।