पापा की प्रेरणा से मिली कामयाबी
अमीनगर सराय की ईशिका गुप्ता ने इस साल सीबीएसई की 10वीं परीक्षा की मेरिट में यूपी में चौथा स्थान हासिल कर जिले का नाम रोशन कर दिया। छात्रा के पिता योगेंद्र गुप्ता कस्बे में किराने की दुकान चलाते हैं। ईशिका का कहना है कि उनकी कामयाबी में पूरे परिवार का योगदान है लेकिन पिता ने हमेशा हौसला बढ़ाया। पढ़ाई को लेकर कभी भी दबाव महसूस नहीं होने दिया। यही वजह है कि उसे कामयाबी मिली।
पिता ने दी प्रेरणा तो खेल के मैदान पर चमके
मलकपुर गांव के अर्जुन अवार्डी सुभाष पहलवान का कहना है कि उनके पिता महावीर चौधरी का उनकी जिंदगी में अहम योगदान रहा। वर्ष 1983 में राष्ट्रीय स्कूल खेल में सुभाष ने स्वर्ण पदक झटका और इसके बाद कभी पीछे नहीं दिखा। जो मुकाम हासिल हुआ है, यह सब पिता की देन है। सुभाष अपने पिता की स्मृति में हर साल दंगल कराते हैं। सुभाष कहते हैं कि पिता ने उन्हें खेल में आगे बढ़ाया था।
प्रो कबड्डी लीग के छठे संस्करण में पुनेरी पल्टन द्वारा 1.15 करोड़ में खरीदे गए मलकपुर गांव के अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी नितिन तोमर का कहना है कि मेरे पिता जितेंद्र कुमार मेरे प्रेरणादायक हैं। खेल का चयन करने में पिता की खास भूमिका रही। पिता ने मेरे लिए कबड्डी का खेल चुना और कदम-कदम पर मेरा साथ दिया। इसलिए आज मै इस मुकाम पर पहुंचा।
बागपत की राजनीति में खास पिता पुत्रों की जोड़ी
जिले की राजनीति में भी पिता-पुत्र की जोड़ी खास रही हैं। रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह छह बार बागपत के सांसद और मंत्री रहे। इसके बाद चौधरी अजित सिंह के बेटे रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी भी पिछले चुनाव से बागपत की राजनीति में सक्रिय हो गए हैं। इस बार दोनों ने एक साथ चुनाव लड़ा।
पूर्व कृषि मंत्री सोमपाल शास्त्री वर्ष 1998 में बागपत से चुनाव लड़ा और जीते। उन्हें भाजपा सरकार में कृषि मंत्री बनाया गया था। उनके पिता रघुवीर सिंह शास्त्री साल 1967 में बागपत से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़े और सांसद बने थे।