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गन्ने की अधिक पैदावार के लिए किसान अपना रहे शराब और डिटर्जेंट

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महंगे दौर में किसान मान रहे कीटनाशक का सस्ता विकल्प
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कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इन तथ्यों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं
मोहम्मद शाह आलम
सरूरपुर। क्षेत्र के किसान गन्ने की पैदावार बढ़ाने के लिए पानी में शराब और डिटर्जेंट मिलाकर छिड़काव कर रहे हैं। उनका मानना है कि इससे गन्ने की फसल पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। फसल में कीट नहीं लगने से पैदावार में बढ़ोतरी होती है। कुछ किसान ईख में महंगे कीटनाशकों के बजाय ऑक्सीटोसिन भी यूरिया में मिलाकर डाल रहे हैं।
दूसरे प्रदेशों की बढ़ती पैदावार को देखकर मेरठ देहात क्षेत्र के किसान महंगाई के इस दौर में सस्ते कीटनाशक ईजाद कर रहे हैं। ये किसान इन दिनों नए-नए प्रयोग कर रहे हैं। वे अपने खेतों में देशी शराब और ऑक्सीटोसिन का छिड़काव कर रहे हैं। उनका मानना है कि इससे गन्ने की पैदावार बढ़ जाती है। वहीं यह गन्ने के लिए कीटनाशक का काम करता है। किसान वीरेन्द्र कुमार मिर्जापुर, जाकिर दमगढ़ी, मोनू बाड़म समेत अन्य का मानना है कि महंगे कीटनाशक खरीदना मुश्किल होता जा रहा है। गन्ने का भुगतान चीनी मिलें एक साल में कर रही हैं। ऐसे में सस्ते कीटनाशक के रूप में किसान इन विकल्पों को अपनाकर फायदा उठा रहे हैं। रासना गांव निवासी किसान सुमित शर्मा एवं मुकेश बताते हैं कि पांच बीघा गन्ने की फसल में छिड़काव के लिए देशी शराब के एक क्वार्टर की जरूरत पड़ती है। बताया कि इसके प्रयोग से कम समय में गन्ने की लंबाई बढ़ने से ज्यादा उत्पादन होने पर फायदा हुआ। ग्राम डालमपुर निवासी संसार सिंह का कहना है कि जब पहली बार इसके बारे में सुना तो थोड़ा झिझक हुई परंतु इस्तेमाल करने का फैसला किया। उनका कहना है कि पिछले कुछ सालों से गन्ने के खेत में शराब का छिड़काव किया तो इसके बेहतर परिणाम सामने आए। शराब के साथ कुछ मात्रा में डिटर्जेंट पाउडर और ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन मिलाने से ईख को बैक्टीरिया और फंगसजनित रोगों से बचाव में मदद मिलती है। वहीं, किसानों का मानना है कि आलू का आकार बढ़ने के साथ कम समय में ज्यादा पैदावार होती है।
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वहीं, कृषि विभाग के अधिकारी किसानों की इस राय से बिल्कुल इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि गन्ना या आलू के ज्यादा उत्पादन में शराब की कोई भूमिका नहीं होती है। हालांकि किसान इसके इस्तेमाल को लेकर उत्साहित हैं। उधर, कृषि वैज्ञानिकों ने खेतों में शराब के छिड़काव को पूरी तरह गलत बताया है। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे मिट्टी की उर्वरता पर प्रभाव पड़ सकता है।
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सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ के वैज्ञानिक डॉ. राकेश सेंगर का कहना है कि फसल उत्पादन बढ़ाने में शराब और डिटर्जेंट के इस्तेमाल का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। किसान अपना पैसा बेवजह बर्बाद कर रहे हैं। इसके लिए हॉर्टिकल्चर अधिकारी को जांच करने के लिए कहा है। इसके अतिरिक्त किसानों को जागरूक करने के लिए निर्देश दिया है। वहीं, हॉर्टिकल्चरिस्ट का कहना है कि शराब में मौजूद अल्कोहल पांच से दस मिनट के अंदर ही उड़ जाता है। इसके प्रयोग से फसलों के उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। इससे बेहतर है कि किसान नीम की पत्तियों को उबाल कर कीटनाशक के रूप में प्रयोग कर सकते हैं।
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