दौराला। सकौती स्थित आईपीएल चीनी मिल क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांवों में किसानों को गन्ने की नई प्रजातियों को अपनाने के लिए जागरूक किया गया। कार्यक्रम में सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसानों से संवाद किया।
वैज्ञानिकों ने बताया कि गन्ने की प्रचलित प्रजाति 0238 बीमारी के कारण बुरी तरह प्रभावित हो रही है, जिससे उत्पादन और आय पर संकट खड़ा हो गया है। इसके समाधान के रूप में कोयंबटूर ब्रीडिंग इंस्टीट्यूट के करनाल सेंटर पर विकसित प्रजाति 0118 की बुआई की सलाह दी गई। वसंतकालीन गन्ना बुआई महाभियान के तहत लगभग 13 गांवों के किसानों से संपर्क कर उन्हें नई प्रजातियां अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। प्रोफेसर आरएस सेंगर ने बताया कि गन्ने की फसल में ट्राइकोडर्मा एक जैविक फफूंदनाशी है जो भूमिगत रोगों को नियंत्रित करने, जड़ों के विकास को बढ़ाने तथा मिट्टी की उर्वरता सुधारने में सहायक है। किसानों को उन्नत कृषि तकनीक, नई बुआई विधियों और फसल प्रबंधन से संबंधित प्रचार सामग्री भी वितरित की गई। वैज्ञानिकों ने चीनी मिल द्वारा संचालित विकास योजनाओं की जानकारी देते हुए किसानों से अपील की कि वे उच्च उत्पादकता वाली किस्मों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाएं।