शामली। जिले में प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के गोलमाल प्रकरण में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। कई किसानों का पिछड़ी जाति के होने के बावजूद फर्जी अनुसूचित जाति का प्रमाण-पत्र बनवाकर उन्हें योजना के लाभ देने के लिए पात्र दर्शा कर रुपये निकाल लिए गए।
मुख्य विकास अधिकारी विनय कुमार तिवारी की जांच में 21.71 लाख का संदिग्ध लेनदेन मिला है। इस मामले में डीलर समेत कई अधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
मुख्य विकास अधिकारी की जांच में फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने के मिले मामलों की बानगी...
केस-1
सहारनपुर के जेहरा गांव के रहने वाले प्रमोद कुमार को योजना का पात्र दर्शाया गया। जांच में सामने आया है कि प्रमोद कुमार पिछड़ी जाति से है मगर उनका अनुसूचित जाति का फर्जी प्रमाणपत्र बनवाकर योजना का लाभ लिया गया। बाद में उनके खाते से रुपये भी निकाल लिए गए, जबकि किसान ने पिछड़ी जाति का प्रमाणपत्र ही लगाया था। प्रमोद के पास 32 हेक्टेयर जमीन दर्शाई गई जबकि उसके पास सिर्फ 0.5288 हेक्टेयर जमीन है।
केस-2
जेहरा गांव के रहने वाले रामानुज ने पिछड़ी जाति के लिए प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत आवेदन किया था। मगर मुख्य विकास अधिकारी की जांच में सामने आया कि किसान को पिछड़ी जाति के बजाय अनुसूचित जाति का दर्शाकर योजना का लाभ लिया गया। किसान के पास सिर्फ 0.8080 हेक्टेयर जमीन थी, जिसे 32 हेक्टेयर दर्शाया गया।
केस-3
जेहरा गांव के ही रहने वाले सूरत सिंह की ऊन क्षेत्र में करीब 0.8080 हेक्टेयर जमीन है, जिसकी कुल जमीन 32 हेक्टेयर दर्शाई गई और किसान को पिछड़ी के बजाय अनुसूचित जाति का दर्शाया गया। अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र भी सत्यापन के दौरान लगा मिला।
- आखिर कहां बनवाए गए फर्जी प्रमाण पत्र
मुख्य विकास अधिकारी ने जांच में फर्जी प्रमाणपत्र बनाने के पांच मामले पकड़े हैं। अब सवाल यह उठता है कि उक्त फर्जी प्रमाणपत्र डीलर, उद्यान विभाग के अधिकारियों या फिर किसी अन्य ने कहां पर बनवाए थे, कौन-कौन फर्जी प्रमाणपत्र बनाने वाले गिरोह में शामिल है। मुख्य विकास अधिकारी ने सभी पर शिकंजा कसने की बात कही है।
- जिलाधिकारी ने निदेशक उद्यान और प्रमुख सचिव को भेजा पत्र
प्रधानमंत्री सिंचाई योजना में गोलमाल प्रकरण का जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान ने पूरा ब्योरा तलब किया है। उन्होंने कार्रवाई के लिए इस संबंध में उद्यान विभाग के निदेशक और प्रमुख सचिव को पत्र भेजा है। कहा कि प्रकरण में जिन-जिन अधिकारियों, कर्मचारियों की मिलीभगत मिलती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। गोलमाल करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे।
- यह है मामला
वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत ऊन, जेहरा क्षेत्र के किसानों ने जिला उद्यान विभाग में आवेदन किया था। बाद में कई किसानों ने डीएम से शिकायत की थी कि विभाग के कुछ कर्मचारियों ने धोखाधड़ी कर उनके खाते में योजना के आए रुपये निकाल लिए। जिलाधिकारी के आदेश पर मुख्य विकास अधिकारी को मामले की जांच सौंपी गई थी।