पिछले पेराई सत्र में किसानों ने करीब 3700 करोड़ रुपये का गन्ना मिलों को बेचा था। इस साल भी किसानों करीब 950 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान मिल चुका है। इसके अलावा किसानों ने सरकार को अरबों रुपये का गेहूं व चावल भी बेचा है। यह वह हिसाब है जो रिकॉर्ड में है।
किसानों ने क्रेशरों पर भी कई लाख क्विंटल गन्ना बेचा है और बाजार में गेहूं, चावल भी बेचा, फिर भी किसानों पर कर्ज कम होने के बजाए बढ़ गया है। जिले के किसानों पर दिसंबर 2020 तक 5384 करोड़ रुपये का कर्ज है।
साल किसान कर्ज
2015 3840
2016 3744
2017 4300
2018 4500
2019 5063
2020 5384
नोट: कर्ज करोड़ रुपये में है।
गन्ना भुगतान की स्थिति
चीनी मिल पिछला भुगतान वर्तमान भुगतान
धामपुर 758.44 237.58
स्योहारा 687.88 219.10
बिलाई 469.79 2.00
बहादरपुर 383.97 169.99
बरकातपुर 454.31 108.59
बुंदकी 410.47 164.93
चांदपुर 208.50 32.16
बिजनौर 130.87 2.33
नजीबाबाद 166.31 5.62
कुल 3670.56 942.34
नोट : भुगतान करोड़ रुपये में है।
फसलों का नहीं मिलता सही दाम
किसान नेता कैलाश लांबा के अनुसार किसानों को उत्पादन लागत तो बढ़ गई, लेकिन किसी भी फसल का सही दाम नहीं मिल रहा। गन्ने की लागत 297 रुपये प्रति क्विंटल है और दाम 325 रुपये प्रति क्विंटल मिलते हैं वो भी साल भर बाद।
सही समय पर भुगतान न मिलने की वजह से पुराना ब्याज बढ़ता गया। जो पैसा आया उससे केवल खर्च चला और कुछ पैसा बैंक में जमा हुआ। सरकार को एमएसपी पर फसल बिक्री की गारंटी देनी चाहिए। ऐसा न होने तक किसान कर्जदार ही रहेगा।
लागत का डेढ़ गुना मूल्य दिलाए सरकार
भाकियू के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह के अनुसार फसलों की लागत लगातार बढ़ रही है और फसलों का लाभकारी मूल्य किसान को मिल नहीं रहा है। घरेलू खर्च भी बढ़े हैं और पारिवारिक परिस्थिति भी। किसान को अगर सरकार कुछ लाभ देना चाहती है तो फसल की लागत का डेढ़ गुना मूल्य किसान को देना चाहिए। डेढ़ गुना मूल्य और एमएसपी पर खरीद की गारंटी किसान की सबसे बड़ी मांग है।