खरखौदा के छतरी मोड पर धरना स्थल पर बैठक करते किसान (संवाद)
- किसानों का आरोप, मेरठ प्रशासन मुख्यमंत्री कार्यालय को कर रहा गुमराह
संवाद न्यूज एजेंसी
खरखौदा। गंगा एक्सप्रेसवे किनारे औद्योगीकरण के लिए दूसरे चरण की भूमि अधिग्रहण के विरोध में तीन गांवों के किसान लगातार 19 माह से धरने पर बैठे हैं। किसानों का आरोप है कि मेरठ प्रशासन उनकी समस्या को मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचाने के बजाय उन्हें गुमराह कर रहा है। किसानों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी समस्या का निराकरण नहीं होगा वह अपनी कृषि भूमि का एक भी इंच नहीं देंगे।
प्रशासन में गंगा एक्सप्रेसवे किनारे औद्योगिक गलियारे के विकास को लेकर बिना किसी विरोध के पहले चरण में करीब 214 हेक्टेयर भूमि प्रशासन ने क्षेत्र के किसानों की अधिग्रहण कर ली थी। दूसरे चरण के अधिग्रहण के लिए प्रशासन ने 292 हेक्टेयर कृषि भूमि को चिह्नित किया है। इसके लिए कस्बा खरखौदा, गांव छतरी, खड़खड़ी व गोविंदपुरी के करीब 800 किसानों की भूमि जानी तय हुई है। सभी किसानों ने एकजुट होकर अपनी भूमि को उपजाऊ बताया और औद्योगिकीकरण के विकास की इस योजना को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने का आग्रह करते हुए जमीन देने से इन्कार कर दिया था। नियमानुसार जब तक 70 प्रतिशत किसानों की सहमति न हो तब तक जमीन का अधिग्रहण संभव नहीं है। इस अधिग्रहण को रद्द करने के लिए किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री को भी प्रार्थना पत्र दिया था। इस योजना को रद्द करने की मांग को लेकर किसान लगातार 19 माह से धरने पर बैठे हैं।
रविवार को धरनास्थल पर हुई बैठक में किसानों ने बताया कि जब मुख्यमंत्री कार्यालय से योजना के विस्तार के लिए दबाव बनाया जाता है तो मेरठ के प्रशासनिक अधिकारी उन्हें गुमराह कर देते हैं। किसानों का कहना है कि मेरठ प्रशासन शायद किसान एकता को तोड़ने का प्रयास कर रहा है। किसानों ने चेतावनी दी कि किसान इस योजना में अपनी एक भी इंच भूमि नहीं देंगे।