खरखौदा/मेरठ। एक साल से धरने पर बैठे किसान मान गए, लेकिन औद्योगिक गलियारे के लिए अपनी जमीन देने से इंकार कर दिया। सरकारी जमीन व चकरोड को चिन्हित करने के लिए पहुंची राजस्व विभाग की टीम को ग्राम प्रधान और किसानों का विरोध झेलना पड़ा। टीम को बैरंग लौट गई। किसानों ने इस अधिग्रहण को तत्काल रद करने की मांग करते हुए जमीन की पैमाइश पर भी आपत्ति की है।
प्रशासन द्वारा औद्योगिक गलियारे के पहले चरण में लगभग 200 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया था, उनके अधिकांश बैनामे भी संपन्न हो चुके हैं। अब दूसरे चरण के तहत खरखौदा क्षेत्र की खड़खड़ी, छतरी और गोविंदपुर की लगभग 300 हेक्टेयर जमीन को चिह्नित करने की योजना बनी हैं। दूसरे चरण के अधिग्रहण का विरोध करते हुए किसान एक साल से छतरी मोड पर लगातार धरने पर बैठे हैं। शुक्रवार सुबह नायब तहसीलदार विनिता रानी और लेखपाल अतुल चौहान के नेतृत्व में राजस्व विभाग की एक टीम सरकारी जमीन, चकरोड को चिन्हित करने के उद्देश्य से पहुंची। धरनारत किसानों के बीच पहुंचकर टीम ने छतरी ग्राम प्रधान अंकित से सहमति के लिए हस्ताक्षर करने का अनुरोध किया। ग्राम प्रधान ने किसानों के साथ अपनी एकजुटता का ऐलान करते हुए हस्ताक्षर करने से साफ इन्कार कर दिया।
पैमाइश का विरोध, वापस लौटी टीम
ग्राम प्रधान के साथ-साथ किसानों ने भी राजस्व विभाग की टीम को इस अधिग्रहण को रद करने की मांग करते हुए एक हस्ताक्षरित प्रार्थना पत्र सौंपा। किसानों ने जमीन की पैमाइश करने के प्रशासन के प्रयास का भी विरोध किया और राजस्व विभाग की टीम को बिना किसी कार्रवाई के वापस लौटा दिया। किसानों ने प्रशासन पर उनकी जमीन जबरन हड़पने की तैयारी करने का गंभीर आरोप लगाया है। चेतावनी दी है कि जमीन का एक इंच हिस्सा भी औद्योगिक गलियारे के लिए नहीं देंगे। इस दौरान शौराज सिंह त्यागी, किसान नेता मामचंद नागर, राजकुमार सिंह, सत्येंद्र मास्टर, शौपाल सिंह, इंद्रमुनि त्यागी, नरेश त्यागी, लीलू नागर सहित कई अन्य किसान और ग्रामीण उपस्थित थे।