भारतीय किसान यूनियन ने 23 सितंबर को उत्तराखंड के हरिद्वार से किसान क्रांति यात्रा आंदोलन का बिगुल फूंका था। किसानों की पदयात्रा मेरठ तक तो सही चलती रही लेकिन, मंगलवार को दिल्ली में घुसते ही यूपी गेट पर बवाल हो गया। इस दौरान पुलिस ने किसानों को रोकने की कोशिश की। लेकिन अपनी मांगों लेकर अड़े किसानों ने कदम पीछे नहीं हटाए और पुलिस का विरोध कर दिया। वहीं पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठी-चार्ज के साथ पानी की बौछारें की।
वहीं किसान संघ और गृहमंत्री राजनाथ सिंह के बीच हुई बैठक में किसानों की 7 मांगों पर सहमति बन गई है। सुरेश राणा ने राजनाथ सिंह के घर के बाहर हो रही बैठक खत्म होने के बाद ऐलान किया कि किसानों और सरकार के बीच 7 मुद्दों पर सहमति बनी है। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत किसान संघ के नेताओं के साथ गाजीपुर सीमा पर बैठे किसानों से मिले और जिन मुद्दों पर बैठक में सहमति बनी थी उनका ऐलान भी किया।
ये है किसानों की अहम मांगें
- डॉ. स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू की जाए, ताकि किसानों को फल, सब्जी, दूध और फसलों का उचित व लाभकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य मिल सके।
- किसानों के सभी तरह के कर्ज एक ही समय सीमा में माफ किए जाएं, क्योंकि किसानों पर 80 प्रतिशत कर्ज राष्ट्रीयकृत बैंकों का है।
- बीते दस वर्ष में सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक देश के तीन लाख किसानों ने आत्महत्या की। पीड़ित किसानों के परिवार का पुनर्वास किया जाए और एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिले।
- पीएम फसल बीमा योजना में बदलाव हो, ताकि प्रत्येक किसान को इकाई मान कर सभी फसलों में स्वैच्छिक रूप से लागू किया जाए।
- किसानों की न्यूनतम आमदनी सुनिश्चित हो। लघु एवं सीमांत किसानों को 60 वर्ष से अधिक आयु में पांच हजार रुपये मासिक पेंशन मिले।
- फसल की सुरक्षा को जंगली जानवरों से बचाव हेतु क्षेत्रीय आधार पर वृहत कार्य योजना बने। देश के कुछ राज्यों में प्रचलित अन्ना प्रथा पर रोक लगाई जाए।
- चीनी मिलों पर बकाया गन्ना भुगतान को ब्याज सहित दिलाया जाए। सिंचाई हेतु नलकूप की बिजली निशुल्क मिले।
- राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा दिल्ली-एनसीआर में दस वर्ष से पुराने डीजल वाहनों पर रोक से किसानों को मुक्त किया जाए।
- सरकार मनरेगा को खेती से लिंक करे। खेती में प्रयुक्त वस्तुओं को जीएसटी से मुक्त किया जाए और कृषि को विश्व व्यापार संगठन से बाहर रखे।
- देश में पर्याप्त मात्रा में उत्पादित फसलों का आयात बंद किया जाए। एशियन मुक्त व्यापार समझौते की आड़ में ऐसे देशों का निर्यात बंद हो, जो उत्पादक नहीं हैं।
- देश में भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास अधिनियम 2013 को सभी मामलों में लागू करें। भूमि अधिग्रहण को केंद्रीय सूची में रखे, ताकि राज्यों में किसान विरोधी कानून न बने।
- किसानों की समस्याओं को लेकर संसद में संयुक्त अधिवेशन बुलाया जाए। एक माह तक की समीक्षा के बाद किसान हक में समाधान निर्णय हो।