किसानों को कैलेंडर के अनुसार गन्ना पर्ची मिलने में आ रही परेशानी
खरखौदा। गन्ना सत्र शुरू होते ही किसानों की परेशानी बढ़ गई है। किसानों के फोन पर ऑनलाइन गन्ना पर्चियां मिलनी थी। लेकिन किसानों को मिले कैलेंडर के अनुसार किसानों को गन्ना पर्चियों का इंतजार करना पड़ रहा है। लेकिन नेट पर किसानों की पर्चियां गायब हैं। किसानों ने इस मामले में अधिकारियों से शिकायत की है।
नवंबर के पहले सप्ताह में अधिकतर गन्ना मिलों का संचालन शुरू हो गया। आलू, सरसों व गेहूं की बुआई के लिए किसानों को गन्ने के खेत खाली करने हैं। किसान पर्ची कैलेंडर भी ले आए हैं। अब किसान कैलेंडर में दिए कार्यक्रम के अनुसार अपनी पर्चियों का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन उन्हें कैलेंडर के अनुसार पर्चियां नहीं मिल रही। किसान ऑनलाइन अपनी पर्चियां चेक कर रहे हैं तो कैलेंडर में जिन किसानों की पर्चियां पहले या दूसरे कालम में लगी थी। अब वह उन कालमों में है ही नहीं। पहले, दूसरे व तीसरे कालम की पर्चियां अब नौवें व 10वें कालम में दिख रही हैं। जिससे किसान साइबर कैफे व गन्ना समितियों के चक्कर काट रहे हैं। किसान अधिकारियों से शिकायत कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि ऑनलाइन पर्चियों के नाम पर धांधली चल रही है। एक-एक किसान का एक सप्ताह में ही 10-10 बीघा रकबा खत्म हो गया, जबकि छोटे किसान अभी भी पर्चियों का इंतजार कर रहे हैं।
मोहिउद्दीनपुर गन्ना समिति के सचिव सुनील वर्मा का कहना है कि संशोधन के लिए माह में दो बार कंप्यूटरों को खोला जाएगा। जिन किसानों की पर्चियों में त्रुटियां हैं, उनमें संशोधन किया जाएगा।
किसानों को जारी नहीं किया पक्का कैलेंडर
माछरा। सहकारी गन्ना विकास समिति मेरठ द्वारा किसानों को अभी तक भी पक्का गन्ना कैलेंडर नहीं दिया गया, जिससे उन्हें पता चल सके कि उनकी पर्ची कब-कब आएगी।
मेरठ-गढ़ मार्ग के किसान गन्ने की आपूर्ति नंगलामल शुगर मिल को करते हैं। जिसमें सहकारी गन्ना विकास समिति मेरठ द्वारा नंगलामल शुगर मिल के किसान जुडे़ हुए हैं। कृषक जितेंद्र, प्रमोद, राकेश आदि ने बताया कि गन्ना पेराई सत्र शुरू होने से पूर्व ही किसानों को गन्ना पर्ची कैलेंडर सहकारी गन्ना विकास समिति मेरठ द्वारा दिया जाना था। अभी तक किसानों को पक्का कैलेंडर नहीं दिया गया है, जिससे किसानों को पता चल सके कि उनकी गन्ना पर्ची कब आनी है। कृषकों ने इसकी शिकायत गन्ना उपायुक्त तथा जिला गन्ना अधिकारी से की है। किसानों ने बताया कि सहकारी गन्ना विकास समिति के सुपरवाइजर किसानों के प्रति उदासीन हैं। किसानों ने प्रदेश के गन्ना मंत्री से शिकायत करने का मन बनाया है।