खादर क्षेत्र में खेत में किसान ने जलाई पराली।
- फोटो : MAWANA
हस्तिनापुर। धान की पराली जलाने पर प्रतिबंध के बावजूद भी लगातार हस्तिनापुर क्षेत्र के दर्जनों गांव के किसान धान की कटाई के उसके अवशेष धड़ल्ले से खेतों में जला रहे हैं। जिन्हें रोकने वाला कोई नजर नहीं आ रहा है। पिछले चार दिनों में स्मॉग ने देहात क्षेत्र को भी प्रभावित किया। जिसमें सांस के रोगियों को सबसे ज्यादा पेरशानी झेलनी पड़ी। कुछ लोगों ने आंखों में जलन भी महसूस की। स्थानीय लोगों को मुताबिक हर साल सैकड़ों किसान पराली खेत में जला देते हैं। सरकार की सख्ती का यहां असर नहीं दिखाई पड़ता है। कई बार तो यही आग वन आरक्षित जंगल तक को तबाह कर देती है। कई जगहों पर कंबाइन मशीनों से धान की कटाई होती है। जल्दी खेत खाली करने के लिए किसान पराली को खेत में जला देते हैं। जिससे वह गेहूं की बुआई कर सकें। हस्तिनापुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. राहुल वर्मा के मुताबिक पराली के धुएं से ब्लैक कार्बन भी बढ़ता है जो ग्लोबल वार्मिंग बढ़ाता है। धुएं के छोटे-छोटे अणु हमारे फेफड़ों में पहुंच जाते हैं धुएं से आंखों में जलन होती है।