भीमकुंड गांव के बाहर भरा पानी स्रोत संवाद
हस्तिनापुर (मेरठ)। पिछले कई दिनों से हो रही बारिश के कारण तूफान पर आई गंगा नदी से खादर क्षेत्र की हजारों हेक्टेयर भूमि जलमग्न हो गई। इससे किसानों के खेत में पकी खड़ी धान की फसल में पानी भरने से नुकसान की आशंका है।
पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के कारण उफान पर आई गंगा नदी से पानी बाहर निकलकर किसानों की खेतों तक पहुंच गया है। इस पानी ने खादर क्षेत्र के किसानों की चिंता को एक बार फिर बढ़ा दिया है। पिछले 24 घंटे से गंगा का पानी लगातार ओवरफ्लो होकर बाहर की ओर निकल रहा है। इस पानी ने खादर क्षेत्र के खेतों में खड़ी हजारों हेक्टेयर फसलों को अपनी चपेट में ले लिया है। इसमें सैकड़ों हेक्टेयर धान की पकी फसल भी है।
बिजनौर बैराज पर तैनात अवर अभियंता पीयूष कुमार ने बताया कि सोमवार शाम 5:00 बजे बिजनौर बैराज से गंगा का जलस्तर 1.59 लाख क्यूसेक चल रहा था। हरिद्वार से गंगा का जलस्तर घटकर 97 हजार क्यूसेक पर पहुंच गया। रविवार से गंगा के जलस्तर में हो रही बढ़ोतरी के कारण पानी बाहर निकलकर क्षेत्र के भीमकुंड, दूधली, मखदूमपुर, बस्तौरा आदि गांवों के जंगलों में पहुंच गया। जिसने यहां पर खड़ी हजारों हेक्टेयर फसल को अपने आगोश में ले लिया। पानी में फसल डूबती देख किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों को मवेशियों के लिए चारा जुटाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
पुलिया का निर्माण नहीं, आवागमन बंद
हस्तिनापुर। क्षेत्र के गांव कुंहेडा से दबखेड़ी, हरिपुर, शेरपुर नई बस्ती, हंसापुर आदि गांवों को जोड़ने वाले मार्ग पर सोती नदी के पुल का निर्माण सिंचाई विभाग द्वारा किया जा रहा है। चार महीने से कछुआ गति से चल रहा पुल का निर्माण कार्य सिंचाई विभाग द्वारा पूरा नहीं किया गया। इस कारण यह मार्ग अब सोती नदी के उफान पर आने के बाद बंद हो गया है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों की लापरवाही यहां हजारों ग्रामीणों पर भारी पड़ रही है। ग्रामीणों ने बताया कि सोती नदी पर सिंचाई विभाग द्वारा चार महीने पूर्व कार्य शुरू कराया गया था। इसकी साइड से मिट्टी का एक स्थायी रास्ता बनाया गया था, जहां से ग्रामीणों का आवागमन चल रहा था। तीन दिन से बारिश के कारण सोती नदी सोमवार को उफान पर आ गई। इससे ग्रामीणों का आवागमन पूरी तरह बंद हो गया है। ग्रामीणों को दूसरे गांव के रास्तों से लंबी दूरी तय कर अपने गांव तक पहुंचना पड़ रहा है।