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किसान मनोहर ने दम तोड़ा, कलक्ट्रेट में तीन घंटे शव लेकर बैठे ग्रामीण

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इकरार अहमद..... टावर से गिरकर हुई किसान की मौत के बाद शव को लेकर जिला अधिकारी कार्यालय के सामने
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मेरठ। अब्दुल्लापुर में गंगानगर एक्सटेंशन योजना में जमीन का मुआयना न मिलने पर खंभे से गिरकर घायल किसान मनोहर सिंह ने सोमवार सुबह 4:00 बजे इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इसके बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट गया। भाकियू टिकैत के जिलाध्यक्ष कार्यकर्ताओं के साथ और किसान की पत्नी, तीनों बेटी, ग्रामीण व पड़ोसी शव कलक्ट्रेट में पहुंच गए। उन्होंने विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को मौत का जिम्मेदार बताकर तीन घंटे नारेबाजी व प्रदर्शन किया। एडीएम सिटी ने डीएम से बातचीत कर पीड़ित परिवार को आर्थिक मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। इसके बाद धरना समाप्त किया गया।
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सिविल लाइन थानाक्षेत्र के प्रगतिनगर निवासी मनोहर (47) की अब्दुल्लापुर में एक बीघा जमीन है, जोकि गंगानगर एक्सटेंशन योजना में है। आरोप है कि विकास प्राधिकरण के अधिकारियों से मुआवजे को लेकर किसान का विवाद चल रहा था। यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन बताया गया। विकास प्राधिकरण की टीम रविवार को किसान की जमीन पर कब्जा लेने गए थे, जहां पर हंगामा हो गया था। इसी दौरान किसान मनोहर 33 हजार केवी के खंभे पर चढ़ गए थे। भावनपुर थाना पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। किसान को खंभे से उतारने का प्रयास किया है, तभी वह करीब 40 मीटर ऊंचाई से गिर गए। घायल किसान को पुलिस ने एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां पर सोमवार सुबह उनकी मौत हो गई।
इसकी जानकारी लगने पर अब्दुल्लापुर, प्रगतिनगर के लोगों का गुस्सा फूट गया। भाकियू जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी, हर्ष चहल सहित उनके कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम हाउस पर भेजने का प्रयास किया, लेकिन लोगों ने हंगामा कर दिया। भाकियू कार्यकर्ता और स्थानीय लोग शव को लेकर कलक्ट्रेट में पहुंच गए। पुलिस ने उनको गेट पर रोकने का प्रयास भी किया, लेकिन वह नहीं माने। डीएम कार्यालय के बाहर महिलाएं सहित करीब 100 से ज्यादा लोग वहां पर पहुंच गए। पुलिस ने कलक्ट्रेट के मुख्यद्वार को बंद कर दिया। भाकियू ने नारेबाजी शुरू कर दी। करीब तीन घंटे हंगामा चला। कलक्ट्रेट में सिविल लाइन, इंचौली, भावनपुर, सहित 10 थाने की पुलिस मौके पर पहुंची।
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भाकियू कार्यकर्ताओं को समझाते रहे अफसर
भाकियू जिलाध्यक्ष और उनके कार्यकर्ताओं को समझाने का प्रशासनिक अधिकारियों ने कई बार प्रयास किया। यह मामला भाकियू राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत तक पहुंचा। पीड़ित परिवार को आर्थिक मुआवजा दिया जाए। भाकियू ने मांग रखी कि परिवार को एक करोड़ का मुआवजा, किसान की बेटी नैना 9 साल, जानवी 12 साल और कनक 7 साल को 5-5 लाख रुपये, बेटियों की पढाई का खर्च विकास प्राधिकरण उठाए व किसान की पत्नी अनीता को नगर निगम में अस्थायी कर्मचारी की नौकरी दी जाए। भाकियू की मांग को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों में मंथन चला। डीएम से अधिकारी बातचीत करते रहे। एडीएम सिटी ने सरकार द्वारा योजना के तहत सारी मदद दिलाने की आश्वासन दिया, तभी धरना समाप्त हुआ।
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