क्यारी को ऐसे स्थान पर बनाया गया, जहां धूप का असर ज्यादा न रहे, बल्कि रात में ओस भी क्यारी पर पड़ती रहे। नियमित रूप से क्यारी में पानी दिया गया, जिसके बाद धीरे-धीरे केसर के बल्ब छोटे पौधे का आकार ले गए और एक पौधे पर फूल भी निकल आया।
अमरजीत सिंह ने बताया कि अक्तूबर माह में केसर के बल्ब लगाने की वजह से तापमान अनुकूल रहा, क्योंकि इसकी पैदावार के लिए अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 5 डिग्री सेल्सियस जरूरी होता है, लेकिन जहां केसर की खेती की जाती है, वहां माइनस में तापमान होना चाहिए।
केसर के अनुकूल नहीं है यहां का तापमान : अरुण कुमार
जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार का कहना है कि सहारनपुर जनपद का तापमान केसर की पैदावार के अनुकूल नहीं रहता है। हो सकता है कि डेयरी संचालक के यहां क्यारी में केसर के पौधे उग गए और फूल आ गया, लेकिन व्यवसायिक तौर पर केसर की खेती के लिए यहां का मौसम अनुकूल नहीं माना जाता है।
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