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ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन से पहले बागपत में धरने पर बैठे एक किसान की मौत

Sat, 26 May 2018 09:06 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, मेरठ
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बड़ौत तहसील में किसान संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान मेें चल रहे पांच सूत्रीय मांगों को लेकर शनिवार की सुबह धरने पर बैठे एक किसान की हार्ट अटैक आने पर मौत हो जाने से किसानों में आक्रोश उत्पन्न हो गया। जबकि एक किसान की हालत बिगड गई। देखते ही देखते धरना स्थल पर किसानों भी भीड़ जमा हो गई।

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अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया। धरना स्थल पर कांग्रेस, सपा, शिव सेना, भाकियू, रालोद कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे । उन्होंने कहा जब तक मृतक के परिजनों को 50 लाख का मुआवजा और एक परिवार को सरकारी नौकरी की मांग पूरी नहीं होगी, किसान का शव उठने नहीं देंगे। आंदोलनकारी किसान शव को बर्फ पर रखे धरने पर बैठ गए। उनके बीच एसडीएम पहुंचे और उन्होंने उन्हें 12 लाख का मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया, लेकिन किसान नहीं माने।

उन्होंने कहा डीएम धरना स्थल पर आए और लिखित में दे तो तभी मानेंगे। धरना स्थल पर एक किसान नेता ने एसडीएम से अभद्रता की तो हंगामा हो गया। बाद मेें लोगों को शांत कर कहा यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वे उग्र आंदोलन शुरू करेंगे।
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तहसील मेें किसान संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान से 21 मई से किसान पांच सूत्रीय मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं। उनकी मांग की है कि नलकूप के बिल 100 हार्स पावर के स्थान पर 180 हार्स पावर किए हैं, इससे सरकार वापस ले। हरियाणा की तरह 35 रुपये हार्स पावर की जाए। घरेलू बिल 430 प्रति माह के हिसाब से 840 रुपये कर किए हैं। इस बढ़ोत्तरी को वापस किया जाए, गन्ने का भुगतान कराएं और विद्युत निगम द्वारा किसानों पर केस दर्ज न की जाए, कई बार किसानों की एसडीएम से वार्ता हुई, लेकिन विफल रही।

किसान की मौत पर अब राजनीति भी शुरू हो गई है। धरने पर बैठे किसान की मौत की जानकारी मिलते ही रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी घटनास्थल की ओर रवाना हो गए। जयंत चौधरी ने इस मामले में ट्वीट कर सरकार का सबक सिखाने की चेतावनी दी है।
 

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सिनौली गांव के किसान जिले सिंह की हालत बिगड़ गई है

दो दिन से धरने पर बैठे जिवाना गांव के 60 वर्षीय उदयवीर पुत्र गिरिवर सिंह की शनिवार की सुबह साढे़ दस बजे सीने में दर्द उठने के बाद हार्ट अटैक से मौत हो गई, जबकि सिनौली गांव के किसान जिले सिंह की हालत बिगड़ गई। इससे किसानों में आक्रोश व्याप्त हो गया और इसकी जानकारी गांव-गांव किसानों को दे दी ।

सूचना पर रालोद के पूर्व विधायक वीरपाल राठी, पूर्व विधायक डॉ. अजय कुमार और गजेंद्र मुन्ना, सतेंद्र तोमर, सुरेश मलिक, विकास प्रधान, रालोद के जिलाध्यक्ष सुखवीर सिंह गठीना, भाकियू के राजेंद्र सिंह तोमर, देश खाप के चौधरी सुरेंद्र सिंह, थांबा खाप के चौधरी यशपाल सिंह, रणधीर प्रधान गुराना, धीरज उज्ज्वल, विक्रम राणा, धूम सिंह चेयरमैन, रालोद युवा इकाई के जिलाध्यक्ष प्रवेंद्र तोमर, राम कुमार चेयरमैन, मोहित मुखिया, अरुण तोमर बोबी, अक्षय मलिक, प्रियवत राणा, सपा के जिलाध्यक्ष मनोज तोमर, सुरेंद्र पंवार, जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चौधरी राम कुमार सिंह, शहर अध्यक्ष राकेश शर्मा, किसान अधिकार सम्मेलन के संयोजक नरेंद्र राणा धरना स्थल पर पहुंचे और इस दुखद घटना पर रोष व्यक्त किया।

उन्होंने कहा किसानों की मांगों को लेकर 21 मई से किसान तहसील परिसर में धरना दे रहे हैं, लेकिन किसी भी अधिकारी ने आंदोलनकारियों सेवार्ता करने की जरूरत नहीं समझी। इस कारण ही एक किसान शहीद हो गया। सूचना मिलते ही तहसीलदार मांगेराम चौहान धरना स्थल पर किसानों के बीच पहुंचे, लेकिन किसानों ने तहसीलदार से वार्ता नहीं की। बाद में एसडीएम अरविंद कुमार द्विवेदी आंदोलनकारियों के बीच पहुंचे और उन्होंने कहा कि वे 12 लाख का मुआवजा दिलाने की संस्तुति मुख्यमंत्री को भेज रहे हैं और किसान मेरे साथ चले और विद्युत निगम के एमडी से बातचीत कराएंगे, किसानों ने एसडीएम की बात भी नहीं मानी।

फिर एसडीएम धरना स्थल किसानों के बीच आए तो नरेंद्र राणा के साथ उनके हाथ पकड़कर अभद्रता का परिचय दिया, लेकिन बाद मेें मामला शांत किया। चेतावनी दी कि एक घंटे में यहां पर डीएम या उच्चाधिकारी बातचीत नहीं करते तो वे उग्र आंदोलन शुरू करेंगे। इस किसान संघर्ष समिति मेें चौधरी बलजोर सिंह आर्य, जसवीर मलिक, ब्रजपाल सिंह, सोनू मान, यशपाल सिंह, विक्रम आर्य, बार के अध्यक्ष वेद पाल पंवार, धर्मवीर सिंह तोमर, जयवीर तोमर आदि मौजूद रहे।
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