दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के लिए परतापुर में चल रहे निर्माण कार्य में किसान बाधक बन रहे हैं। किसानों का आरोप है एनएचएआई ने जबरन जमीन को कब्जाया है। मनमाफिक मुआवजा भी नहीं मिल सका है। उधर मानसून के कारण भी कार्य प्रभावित हो सकता है।
शुक्रवार को किसान विकास अरोड़ा ने अपने खसरा नंबर 792 में जमीन की ड्रोन से वीडियोग्राफी कराई। वहीं, उसने एनएचआई अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि जमीन को जबरन कब्जाया गया है। इसके लिए वह कोर्ट में अपील करेगा। उसने कहा कि एनएचआइ अधिकारियों ने पैमाइश से ज्यादा जमीन को घेर लिया है । वहीं, चौथे चरण में डासना से मोहिउद्दीनपुर तक चल रहे निर्माण कार्य सुस्ती से चल रहा है। हालांकि, एनएचएआइ अधिकारियों का दावा है कि इस चरण का कार्य 52 प्रतिशत पूरा किया जा चुका है। इसे सितंबर-2019 तक हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा। डासना से मेरठ-मोहिउद्दीनपुर तक 32 किलोमीटर का कार्य किया जाना है। इस कार्य को अप्रैल-2018 से शुरू किया गया था, लेकिन जमीन अधिग्रहण और लोकसभा चुनाव के कारण कार्य की रफ्तार धीमी होती चली गई है। अब मानसून इस कार्य पर रोक लगा सकता है।
कई फुट ऊंची मिट्टी की लेवलिंग
एक्सप्रेस-वे पर कई फीट ऊंची मिट्टी की परत जमाने के बाद खतरा बढ़ता जा रहा है। बारिश होने के बाद यहां रोलर चलाना भी खतरनाक हो सकता है। जिससे कार्य की रफ्तार और सुस्त पड़ जाएगी। मिट्टी बहने का भी खतरा है। ऐसे में यहां दलदल होने से एक बार फिर एक्सप्रेस-वे पर मिट्टी का कार्य प्रभावित होगा। वहीं, बहादरपुर अंडरपास से मिटटी की लेबलिंग की जा रही है। यहीं से मेरठ- दिल्ली रेलवे लाइन तक भराव का कार्य किया जाना है।
हमें बताना चाहिए था
अगर कोई आपत्ति थी तो हमें बतानी चाहिए थी। ऐसे जमीन नहीं कब्जाई जाती है। कागजों में जितनी जमीन होगी उतना ही मुआवजा दिया जाता है। अगर ज्यादा ली गई होगी तो मुआवजा पूरा दिया जाएगा। - आरपी सिंह, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई