समझौता होने के बावजूद अभी तक प्रतिकर न मिलने से आक्रोशित किसानों ने बृहस्पतिवार को एमडीए कार्यालय पर ‘डेरा डालो-घेरा डालो आंदोलन’ का बिगुल फूंक दिया। ट्रैक्टर ट्रालियां लेकर एमडीए परिसर में घुसे किसानों ने तंबू लगा दिया। सभी गेटों पर महिला किसानों ने कब्जा कर लिया और अधिकारियों का बाहर निकलने का रास्ता बंद कर दिया। चिता सजाकर महिला किसान को इस पर लिटा दिया गया। काफी हंगामे के बाद हुई वार्ता में एक सप्ताह का आश्वासन मिलने पर किसान माने। लेकिन चेतावनी दी कि यदि आश्वासन पूरा नहीं हुआ तो फिर आंदोलन होगा।
यह चल रहा विवाद
प्रतिकर की मांग को लेकर लोहियानगर, गंगानगर तथा वेदव्यासपुरी योजना के किसानों ने आंदोलन किया। किसानों का कहना था कि शताब्दीनगर की तर्ज पर उन्हें भी मुआवजा दिया जाए। 11 नवंबर 2015 को एमडीए बोर्ड बैठक में परिचालन प्रस्ताव के माध्यम से यह प्रस्ताव मंजूर हो चुका है कि किसानाें को रकम के बदले भूखंड दिए जाएंगे।
टूट गया सब्र का बांध
इस समझौते का पालन न होने पर किसानों के सब्र का बांध टूट गया। गंगानगर संघर्ष समिति के किसान पहले ही आंदोलन की चेतावनी दे चुके थे। बृहस्पतिवार को तीनों योजनाओं के किसान सुबह दस बजे ट्रैक्टर ट्रालियों में सवार होकर एमडीए परिसर पहुंचे तो रोजाना एमडीए का गेट बंद रखने वाले होमगार्ड भी किसानों को देखकर पीछे हट गए और गेट खोल दिया। इस पर किसानों ने ट्रैक्टर ट्राली लगाकर अधिकारियों की गाड़ियां निकलने का मार्ग बंद कर दिया।
कैद होकर रह गए अधिकारी
महिलाओं ने मुख्य गेट पर ही धरना शुरू कर दिया। साफ कहा कि इस गेट से किसी अधिकारी को बाहर नहीं निकलने दिया जाएगा। गाड़ी तो पहले ही नहीं निकल रही थी। ऐसे में अधिकारी भीतर ही कैद होकर रह गए। वीसी समेत सभी अधिकारी अपने कार्यालय में बैठे रहे।
चिता पर लिटा दिया महिला को
किसानों ने आत्मदाह का एलान किया था। महिला विंग अध्यक्ष जागेश्वरी देवी ने चार बजे आत्मदाह की घोषणा की थी। लेकिन किसानों ने तीन बजे ही चिता लगाकर बुजुर्ग महिला किसान सरदारी को चिता पर लिटा दिया और उपले लगाने शुरू कर दिए। सभी कहने लगे कि यह कैसा आत्मदाह है? विचित्र स्थिति पैदा हो गई। थाना सिविल लाइन पुलिस, महिला कांस्टेबलों के साथ पहुंची। इंस्पेक्टर सिविल लाइन विजय कुमार ने बमुश्किल महिला को चिता से उठाया। कहा कि ऐसा न करें। यह वैसे भी गैरकानूनी है। इस तरह किसी को चिता पर नहीं लिटाया जा सकता है।
ताले, हथौड़े लेकर आए थे किसान
किसान अपने साथ ताले, हथौड़े, छैनी लेकर आए थे। यदि कहीं ताले तोड़ने पड़ें तो तोड़े जाएं और लगाने पड़े तो लगाए जाएं। इंतजाम पूरा रहा। भोजन बनाया गया। तंबू लगा। साथ ही किसान कूलर, पंखे सब लेकर आए थे जो आते ही चालू कर दिए गए।
चार बजे बनी बात
किसानों ने एलान कर दिया कि चार बजे आत्मदाह होगा। साथ ही जो किसान आत्मदाह करेगा, वह एमडीए अधिकारियों से भी जाकर लिपटेगा। इस पर हड़कंप मच गया। सिटी मजिस्ट्रेट अवधेश कुमार, एसीएम आदि पहुंच गए और किसानों को वार्ता के लिए बुलाया। सभागार में वार्ता हुई जिसमें वीसी योगेंद्र यादव, सचिव अवनीश शर्मा, सचिव बैजनाथ, सिटी मजिस्ट्रेट, तहसीलदार करनवीर सिंह, तथा किसानों की तरफ से महामंत्री हरविंदर सिंह, सत्यपाल, विनोद समेत काफी किसान मौजूद रहे। वीसी ने कहा कि डीएम से बात हुई है। एडीएम (एलए) छुट्टी पर हैं। उनके आते ही डीएम से आदेश कराकर किसानों के मुआवजे की गणना शुरू कर दी जाएगी। रही बात बुलंदशहर हाईकोर्ट प्रकरण की तो उसके लिए किसानों की इस प्रक्रिया का रोका नहीं जाएगा।
कार्यवृत्त बनने पर सहमति
किसान इस बात पर मान गए। एक सप्ताह का समय दिया। हरविंदर सिंह ने कहा कि बैठक के मिनिट्स जरूर जारी हों। इस पर सहमति बनी कि बैठक का कार्यवृत्त बनेगा। किसानों ने कहा कि सारी बातें ऑन रिकॉर्ड हों तो ही बात आगे बढ़ेगी। इस मौके पर सत्यपाल, चमन सिंह, अज्जू, चंदन, मंगत सिंह, पप्पू, धर्मपाल, सत्यपाल, रामेश्वर शर्मा, सुभाष, विनोद चेयरमैन, सुरेश, भीम, शिमला, जागेश्वरी, शारदा, सविता समेत काफी किसान मौजूद रहे।