यूपी के सहारनपुर में संवाददाताओं से बातचीत में फराह फैज ने कहा कि एक आदमी जो फोन पर या फिर व्हाट्सएप पर आराम से तीन तलाक देकर निकल जाता था। यहां तक कि उसे सामने आने की भी जरूरत नहीं थी। इस फैसले के बाद ऐसे लोगों पर पकड़ हो गई है। उसके खिलाफ शिकायत की जा सकती है। मामला दर्ज कराया जा सकता है और यदि वह व्यक्ति नहीं मानेगा तो उसे सजा भुगतनी पड़ेगी।
मुस्लिम महिलाओं में इस फैसले को लेकर खुशी की लहर है। इस सवाल पर फराह फैज ने कहा कि लड़कियां और महिलाएं बहुत मजबूर थीं। वे कहती थीं कि यदि हम अपनी शिकायत लिखावने थाने या कचहरी जाते हैं तो अक्सर सुनने को मिलता था कि हम मजबूर है आपकी मदद नहीं कर सकते। सीधे तौर पर इसके लिए कोई प्रेविजन नहीं था लेकिन आज उनके पास है।
फैसले को राजनीतिक स्टंट बताए जाने को लेकर उन्होंने कहा कि विरोधी पार्टियों को का तो यही काम है। कांग्रेस के पास 1986 में ये मौका था जिसको उन्होंने खो दिया। यदि उस वक्त ये फैसला आ जाता तो गेंद भाजपा के पाले में नहीं जाती। बीजेपी ने यदि ये कदम उठाया है तो सराहना किया जाना उचित है।
उन्होंने कहा कि सैंकड़ों महिलाएं मेरे टच में हैं, जिनका केस में पर्सनली लड़ रही हूं। ऐसी कई महिलाएं हैं जो घरेलू हिंसा व तीन तलाक के मामले में न्याय के लिए अपनी लड़ाई जारी रखे हुए हैं। ये फैसला उनके लिए राहत देने वाला है।फराह ने कहा कि यकीनन ये हमारी जीत है। हालांकि मेरी मांग एक पूरे फैमिली एक्ट के लिए थी। लेकिन इस दिशा में हम एक कदम आगे बढ़े हैं जो हमारी डिमांड थी वो पूरी हुई है। मेरी लड़ाई अभी जारी है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक बार में तीन तलाक (तलाक ए बिद्दत) को दंडनीय अपराध बनाने संबंधी अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को यह जानकारी दी। ‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक’ को लोकसभा की मंजूरी मिल चुकी है लेकिन यह राज्यसभा में लंबित है। वहां पर सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है। गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने पिछले वर्ष इस प्रथा पर रोक लगा दी थी। यह प्रथा अब भी जारी है इसलिए इसे दंडनीय अपराध बनाने की खातिर विधेयक लाया गया।
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