मशहूर गायक जावेद अली के पिता संगीतकार हामिद अली का मुंबई में गोरेगांव स्थित आवास पर हृदयगति रुकने से निधन हो गया। हामिद अली की इच्छा थी कि मौत के बाद उन्हें उनके पैतृक कस्बे में ही दफनाया जाए। बुधवार देर शाम मुंबई से हामिद का शव शाहपुर जिला मुजफ्फरनगर लाया गया। देर शाम उनका शव दफना दिया गया। संगीतकार हामिद अली (70) का जन्म शाहपुर कस्बे के कव्वाल परिवार में हुआ था। हामिद अली ने खानदानी पेशे से जुड़कर कस्बे की रामलीलाओं से गायकी की शुरुआत की। करीब 40 वर्ष पूर्व हामिद अली अपने परिजनों के साथ दिल्ली जाकर रहने लगे।
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घर पर उमड़ी भीड़
कव्वाली के जरिए उन्होंने देश-विदेश में अपनी आवाज का जादू बिखेरा। तीनों बेटों परवेज, जावेद अली और नुसरत को भी उन्होंने गायकी से जोड़कर बेहतरीन कलाकारों में शुमार कर दिया। हामिद के दूसरे नंबर के बेटे जावेद अली की जादुई आवाज का देश-विदेश में जलवा है। कजरारे-कजरारे तेरे काले-काले नैना, रंग रे जिया ये क्या किया, बातों-बातों में रुठे जिया, आदि मशहूर गानों को आवाज दी है। सारेगामापा में जावेद अली जज की भूमिका में हैं। उनके दो बेटे संगीत और एक्टिंग में अपनी पहचान बनाए हुए हैं।
हामिद अली के बचपन के दोस्त मुंशी यामीन ने बताया कि हामिद अली प्रत्येक वर्ष मोहर्रम पर शाहपुर कस्बे में आया करते थे। मशहूर गायक जावेद अली के मुंबई स्थित आवास पर फिल्मी जगत की हस्तियों ने पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त की। बेटे ने बताया कि हामिद अली की इच्छा थी कि उनकी मौत के बाद उन्हें उनके पैतृक कस्बे में ही दफनाया जाए। देर शाम मुंबई से हामिद का शव शाहपुर कस्बे में उनके आवास पर लाया गया। उनके जनाजे में दूरदराज से आए उनके परिजनों सहित कस्बे के सैकड़ों लोग पहुंचे। नमाज के बाद उनका शव सुपुर्द-ए-खाक किया गया।