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झाड़-फूंक कराते रहे परिजन...सर्पदंश से युवक की मौत

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सरूरपुर। सांप के डसने मृतक मोहम्मद शाद फ़ाइल फोटो। परिजन
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सरूरपुर (मेरठ)। सांप के काटने पर लोग अस्पताल जाकर एंटीवेनम इंजेक्शन लगवाने के बजाय अभी भी झाड़-फूंक के चक्कर में पड़े हुए हैं और जान गवां रहे हैं। शनिवार को सरूरपुर थाना क्षेत्र के गांव खेड़ी कलां में सर्पदंश के बाद झाड़ फूंक के चलते 18 वर्षीय मोहम्मद शाद पुत्र कामयाब की मौत हो गई।
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कस्बा हर्रा निवासी कामयाब अपने परिवार के साथ गांव खेड़ी कलां में किराए के मकान रहते हैं। कामयाब ने बताया कि उनका बेटा मोहम्मद शाद शुक्रवार की रात चारपाई पर सोया था। शनिवार तड़के करीब चार बजे सोते समय उसकी गर्दन पर सांप ने काट लिया। नींद के चलते उसने इसे अनदेखा किया और सो गया। कुछ देर बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। परिजनों ने पहले उसे गांव के अपंजीकृत चिकित्सक को दिखाया। आराम न लगने पर हर्रा कस्बे में ही झाड़-फूंक करने वालों के पास घूमते रहे। करीब चार घंटे तक झाड़-फूंक कराते रहे। इस दौरान युवक की हालत लगातार बिगड़ती रही। बाद में उसे सरधना के आरएन अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद भी कई झाड़-फूंक वालों के पास शव को ले जाया गया। युवक की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। देर शाम गमगीन माहौल शव को सुपुर्द ए खाक कर दिया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शाद की मौत लापरवाही और अज्ञानता का परिणाम है। अगर उसे समय पर अस्पताल ले जाया गया होता, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी।
सीएमओ डॉ. अशोक कटारिया का कहना है कि सांप के काटने पर सरकारी अस्पताल जाकर एंटीवेनम इंजेक्शन लगवाना चाहिए। इसे एंटीवेनिन भी कहा जाता है। यह इंजेक्शन सांप के काटने पर उसके नुकसानदायक पऱभाव को नष्ट करता है। सरकारी अस्पतालों में यह निशुल्क लगाया जाता है।
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सर्पदंश के मामलों में समय पर इलाज जरूरी
सीएचसी प्रभारी डॉ. राघो सिंह ने बताया कि सर्पदंश के मामलों में पहले एक घंटे में यदि पीड़ित को उचित इलाज मिल जाए तो जान बचाना संभव होता है। झाड़-फूंक या घरेलू उपायों के चक्कर में पड़ने से जहर शरीर में तेजी से फैल जाता है जिससे मौत का खतरा बढ़ जाता है। उन्हाेंने कहा कि सर्पदंश जैसी गंभीर स्थिति में तुरंत मरीज को नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है ताकि लोग अंधविश्वास छोड़कर वैज्ञानिक उपचार को अपनाएं। अभी जागरूकता की जरूरत है।
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