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यूपी: पहले लव मैरिज फिर पत्नी को अस्पताल में छोड़ा, बेटी पैदा होने से था नाराज

Fri, 05 Oct 2018 05:30 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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पीड़िता महिला
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उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे जानकर आप भी चौंक जाएंगे। एक युवक ने करीब 20 दिन पहले मुजफ्फरनगर सीएचसी में महिला को भर्ती कराया था। जहां महिला ने बेटी को जन्म दिया। इसके बाद महिला की तबीयत बिगड़ गई और उसे मेरठ के लिए रेफर कर दिया। महिला के पति ने उसे मेरठ के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया था। चौंका देने वाली बात यह है कि पति ने अस्पताल में भर्ती तो कराया लेकिन, वह अभी तक न तो उसे लेने आया और न ही फोन उठा रहा है। अस्पताल के कर्मचारियों का कहना है कि महिला का कोई भी परिचित उसे ले जाने को तैयार नहीं है। 

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बताया जा रहा है कि महिला ने लव मैरिज किया था। और महिला के अब दो बेटियां हैं। एक बेटी बड़ी है। पीड़ित महिला का कहना है कि उसका पति बेटियां होने से नाराज है, जिसकी वजह से वह लेने नहीं आ रहा है।

वहीं अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया कि 15 दिनों में महिला पर डेढ़ लाख का खर्च आ चुका है। लेकिन अभी तक कोई भी उसे लेने नहीं आया है। वहीं, अस्पताल एमडी रविंद्र डागर ने कहा कि महिला को नौकरी का ऑफिर दिया गया है। वह स्वस्थ होने के बाद अस्पताल में नौकरी कर सकती है।   
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पहले भी सामने आए ऐसे मामले 
मेडिकल अस्पताल में करीब डेढ़ माह की एक बच्ची लावारिस हालत में मिली थी। उसके परिजनों को तलाशने की कोशिश की गई। लेकिन वह नहीं मिले। बच्ची को नर्सरी में रखा गया था। उसके खून में इंफेक्शन था। वह अगर सोचने-समझने लायक होती तो शायद यही कहती कि ‘मम्मी-पापा! मैं लड़की हूं... क्या यही मेरा कुसूर है। मुझे इसी लिए छोड़ा गया। अगर मैं बेटा होती तो भी क्या छोड़ दिया जाता।’

ऐसा इसलिए भी कहा जा सकता है कि क्योंकि ज्यादातर बेटियां ही इस तरह छोड़ी जा रही हैं, बेटे नहीं। मेडिकल अस्पताल के सीएमएस डॉ. अजीत चौधरी ने बताया था कि सुबह करीब 11 बजे बच्ची गायनिक वार्ड के पास खाली जगह में मिली। उसके हाथ में दूध की बोतल थी। उसके रोने की आवाज सुनकर वहां मौजूद मरीजों के तीमारदारों का ध्यान उस तरफ गया। उन्होंने पहले उसके परिजनों को आवाज लगाई। कोई जवाब न मिलने पर मेडिकल के अधिकारियों को सूचना दी। जिस पर सीएमएस और आशा ज्योति केंद्र की पदाधिकारी पहुंचीं। उन्होंने बच्ची की तबियत खराब देखकर उसे नर्सरी में भर्ती कराया था। सीएमएस ने बताया था कि ऐसा लग रहा है कि कोई परिवार का व्यक्ति ही बाहर से बच्ची को यहां छोड़ गया है।

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पहले भी सामने आए ऐसे केस
- करीब चार माह पहले सहारनपुर जिले में दो दिन की बच्ची को एक महिला एक घर के बाहर छोड़कर चली गई थी। हालांकि घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी और पुलिस ने बाद में उस महिला को पकड़ लिया था।
- करीब तीन माह पहले शामली में बस की सीट की नीचे 15 दिन की बच्ची को छोड़ दिया गया था। इस बच्ची के परिजन नहीं मिल सके हैं।
- मई माह में गंगानगर के एक अस्पताल में महिला की मौत के बाद परिजन नवजात को छोड़ गए थे। बाद में दबाव के बाद परिजन उसे ले गए थे।
- पिछले दिनों मेडिकल अस्पताल में भी एक नवजात गायब हो गई थी, जिसका अभी तक कोई सुराग नहीं लग सका है।
- इस तरह की घटनाएं बढ़ रही हैं, शायद यही वजह की प्रदेश में ‘पालना’ व्यवस्था शुरू की गई है, जिसमें सरकारी अस्पतालों और सीएचसी पर पालना रखा गया है, ताकि लावारिस बच्चों को इधर-उधर फेंकने के बजाय वहां छोड़ा जा सके।

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