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सावधान : कहीं नकली दवा तो नहीं खा रहे आप, कानपुर के शख्स की निशानदेही पर मेरठ में बरामद हुईं करोड़ों की नकली दवाएं

Sat, 26 Jun 2021 03:10 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

पुलिस का दावा है कि अभी अल्ट्रासेट के 1390 पत्ते, नैनड्रोन इंजेक्शन 122, कुछ डेकाड्यूराबोलीन इंजेक्शन, पैकिंग मशीन, डाई, दवा के भारी मात्रा में प्रिंटेड गत्ते के डिब्बे बरामद किए गए हैं।
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Fake medicine - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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दिल्ली रोड स्थित साईंपुरम के गोदाम से करीब एक करोड़ रुपये की नकली दवाइयां बरामद हुई हैं। पुलिस और औषधि विभाग ने कार्रवाई कर एक आरोपी को दबोच लिया। दवाइयां अलीगढ़ में बनाई जाती हैं और मेरठ में इनकी पैकिंग की जाती थी। यह अवैध धंधा आरोपियों ने कोरोना काल में शुरू किया था। दवाइयों के रैपर पर साल्ट का नाम नहीं लिखा है। कार्रवाई कानपुर के सरगना मनीष मिश्रा की निशानदेही पर की गई है। अलीगढ़ में नकली दवा बनाने की फैक्टरी पकड़ी है। यहां से भी करीब 50 लाख का माल बरामद किया गया है। अलीगढ़ में फैक्टरी के मालिक अशोक कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया है। 
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ब्रह्मपुरी पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर शुक्रवार दोपहर साईंपुरम इंडस्ट्रियल एरिया में छापा मारा है। यहां पर मोनू लोधी ने मकान में ही गोदाम बनाया हुआ है। प्रथम तल पर उसका परिवार रहता है। इंस्पेक्टर ब्रह्मपुरी सुभाष अत्री ने बताया कि गोदाम से काफी मात्रा में नकली दवाइयां बरामद की हैं। डाई और मशीन भी कब्जे में ले ली हैं। 

करोड़ों की दवाएं सप्लाई कीं 
कोरोना काल में आरोपियों ने करोड़ाें रुपये की नकली दवाइयां बाजार में सप्लाई कीं। आरोपी से पुलिस और ड्रग विभाग की टीम पूछताछ कर रही है। पुलिस का दावा है कि अभी अल्ट्रासेट के 1390 पत्ते, नैनड्रोन इंजेक्शन 122, कुछ डेकाड्यूराबोलीन इंजेक्शन, पैकिंग मशीन, डाई, दवा के भारी मात्रा में प्रिंटेड गत्ते के डिब्बे बरामद किए गए हैं।
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कोरोना काल में शुरू किया धंधा 
मोनू की मुलाकात अलीगढ़ के गोपी से कब हुई, इसका पता पुलिस लगा रही है। शुरुआती पूछताछ में मोनू ने बताया कि वह प्रिंटिंग प्रेस चलाता है। कोरोना के चलते उसका काम बंद हो गया था। इसी बीच उसकी गोपी से मुलाकात हुई थी। गोपी ने कहा था कि अगर वह उसकी दवा पैक करने का काम संभालता है तो इसकी एवज में उसे अच्छा खासा मुनाफा हो जाएगा। इस काम में किसी लाइसेंस की भी जरूरत नहीं है। 

खरखौदा में पकड़ी थी फैक्टरी 
कोरोना काल में नकली दवाइयों को धंधा खूब चला। बताया गया कि देहात इलाके में यह नकली दवाइयां झोलाछाप डॉक्टरों और मेडिकल स्टोर में खूब बेची गईं। इन दवाइयों पर कोई साल्ट नहीं लिखा है। जिसके चलते इन दवाइयों को सस्ती दरों पर बेचा जाता था। 

साईंपुरम में नकली दवाइयों पकड़ने जाने का यह पहला मामला नहीं है। दो सप्ताह पहले मुंबई पुलिस ने खरखौदा में दवाइयों की फैक्टरी पकड़ी थी। जहां पर नकली दवाइयां बनाई जा रही थीं। बताया गया कि कोरोना काल में नकली दवाइयां बनाने के लिये कई फैक्टरी बनाई गईं। धीरखेड़ा क्षेत्र से कोलकाता, महाराष्ट्र, गुजरात जैसे राज्यों में दवाइयों को सप्लाई किया जाता था। मेरठ के अलावा गाजियाबाद व नोएडा में भी इनका कनेक्शन निकला था। औषधि विभाग यह मानकर चल रहा है कि ऐसे में शहर में नकली दवा के अनैतिक कारोबार से जुड़े कुछ और लोग छिपे हो सकते हैं।
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युवाओं को तो नहीं परोसा जा रहा नशा : अल्ट्रासेट दवा एक पेन किलर है। यह केवल डॉक्टर के पर्चे पर ही मिलती है। जिस तरह मकान में यह दवा पैक होती मिली है, उससे इसके नकली होने की संभावना बढ़ गई है। 
ड्रग एसोसिएशन ने भी ली जानकारी : जिला मेरठ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन अध्यक्ष नरेश चंद गुप्ता ने सीओ ब्रह्मपुरी अमित राय, इंस्पेक्टर सुभाष अत्री और औषधि निरीक्षक पवन शाक्य से जानकारी ली।  

पूछताछ कर रही पुलिस 
ब्रह्मपुरी पुलिस ने कार्रवाई की और इस कारनामे को उजागर किया। अलीगढ़ से इनपुट हाथ लगा था। करीब एक करोड़ की दवाइयां मिलना बताया गया है। फिलहाल पुलिस पूछताछ में जुटी है। ड्रग विभाग की तहरीर पर केस दर्ज कर लिया है। दवाइयां नकली हैं।  - विनीत भटनागर, एसपी सिटी

नमूने जांच के लिए भेजे 
छापे के दौरान दवा और इंजेक्शन बरामद किए हैं। नमूने जुटाकर फूड सेफ्टी ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की लखनऊ स्थित लैब में जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। प्रबल संभावना है कि दवाइयां नकली हैं। मामले में सख्त    कार्रवाई कराई जाएगी। - पवन शाक्य, औषधि निरीक्षक
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