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फर्जी डॉक्टर के अजब कारनामे : रजिस्ट्रेशन नहीं था फिर भी करता रहा सर्जरी, कई अस्पतालों में करता था विजिट

Sun, 11 Jul 2021 04:30 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

बताया गया कि आरोपी डॉक्टर ने एक मरीज की किडनी निकाल कर बेची थी, यह मामला काफी चर्चित हुआ था। लेकिन स्वास्थ्य विभाग में मामले में लीपापोती कर आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
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मेरठ में फर्जी डॉक्टर को ले जाती पुलिस। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया डॉ. मनीष कौल उर्फ विक्रांत भगत बड़ा शातिर निकला। मनीष उर्फ विक्रांत ने अपने बोर्ड पर एमबीबीएस और एमडी की डिग्री तो लिख ली, लेकिन इस डिग्री के लिए यहां उसका रजिस्ट्रेशन तक नहीं मिला है।  इसके बावजूद मरीजों के इलाज के साथ ही वह सर्जरी तक करता रहा।

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एमबीयूएमएस (बैचलर ऑफ यूनानी मेडिसन एंड सर्जरी) की डिग्री के बाद मेरठ में उसके दो क्लीनिक थे। इसमें अलग-अलग दोनों जगह पर उसने खुद को एमबीबीएस व एमडी बताया था। एसीपी (पश्चिम) गिरीश कौशिक के मुताबिक दिल्ली के द्वारिकापुरी निवासी फर्जी डॉक्टर मनीष कौल उर्फ विक्रांत भगत 2019 से वांटेड चल रहा था।

वह दिल्ली पुलिस की कस्टडी से भागकर मेरठ में नाम बदलकर फर्जी डिग्री के जरिए क्लीनिक खोलकर मरीजों का इलाज करता था। दिल्ली पुलिस शुक्रवार को हापुड़ रोड स्थित शुभकामना अस्पताल से फर्जी डॉक्टर को पकड़कर ले गई थी। आरोपी का पिता बृजभूषण भी तिहाड़ जेल में बंद है। उस पर भी कई जगहों पर ठगी के केस हैं।
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दिल्ली पुलिस ने शनिवार को आरोपी मनीष को तीस हजारी कोर्ट में पेश कर दिया। यहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया है। पुलिस का दावा है कि आरोपी मनीष कौल को दिल्ली की पुलिस रिमांड पर लेकर अभी ओर पूछताछ करेगी। 

मेरठ पुलिस की पड़ताल में पता चला कि हापुड़ रोड स्थित साईं अस्पताल के पास विक्रांत के नाम से क्लीनिक है। इस पर एमबीबीएस और एमडी मेडिसिन फिजीशियन की डिग्री लिखी है जबकि तेजगढ़ी चौराहा स्थित त्यागी कांपलेक्स में उसने एमबीबीएस एमडी सर्जन लिखा है।

10 राज्यों में धोखाधड़ी के 27 केस दर्ज
पुलिस की अपराध शाखा के मुताबिक आरोपी के खिलाफ 10 राज्यों में धोखाधड़ी के 27 मामले दर्ज हैं। एसीपी गिरीश कौशिक की टीम जानकारी जुटा रही थी। कॉल को इंटरसेप्ट करने के दौरान शुक्रवार को पता चला कि मनीष ने ऑनलाइन खाना ऑर्डर किया। डिलीवरी बॉय की मदद से पुलिस शास्त्री नगर के एक नर्सिंग होम में पहुंची और उसने आरोपी मनीष को दबोच लिया।

आरोपी नर्सिंग होम में डॉ. विक्रांत बनकर नौकरी कर रहा था। वह खुद को एमबीबीएस, एमडी बताता था। पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह कई अस्पतालों में डॉक्टर की नौकरी कर डेढ़ लाख रुपये सैलरी भी ले चुुका है। आरोपी ने 12वीं पास करने के बाद बीयूएमएस में दाखिला लिया था, लेकिन उसने दो साल बाद ही पढ़ाई छोड़कर धोखाधड़ी शुरू कर दी थी। 

पिता की फैक्टरी में हाथ बंटाता था आरोपी
आरोपी मनीष ने बताया कि उसका जन्म अंबाला कैंट इलाके में 1984 में हुआ था। पिता ब्रिजभूषण कौल की अंबाला में दवा की फैक्टरी थी। 2002 से आरोपी पिता की फैक्टरी में हाथ बंटाने लगा। सबसे पहले सहारनपुर में उसके खिलाफ एक कंपनी से धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ था। 2002 से 2008 के बीच कई बार उसके खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ।

निजी अस्पताल में थी साझेदारी, मरीज की बेची थी किडनी
पुलिस का दावा कि मनीष की हापुड़ रोड स्थित एक अस्पताल में साझेदारी भी थी। बताया है कि उसने एक मरीज की किडनी निकाल कर बेची थी, यह मामला काफी चर्चित हुआ था। लेकिन स्वास्थ्य विभाग में मामले में लीपापोती कर आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद स्थानीय लोगों ने इस फर्जी डॉक्टर के कई कारनामे बताएं। 

अलग-अलग डिग्री बताकर करता था इलाज
मनीष ने कई अस्पतालों में विजिट करने का ठेका लिया था। मरीज की बीमारी पूछकर वह खुद को उसका स्पेशलिस्ट बताकर इलाज शुरू करता था। बताया जा रहा कि कोरोना काल में इस फर्जी डॉक्टर ने काफी संख्या में मरीज देखें। ऐसे में न जाने कितने मरीजों को नुकसान पहुंचाया होगा। यह भी संभव है कि कई लोगों की जान इस फर्जी डॉक्टर की लापरवाही के चलते गई।

एमबीबीएस डॉक्टर बता दो महिलाओं से की शादी
आरोपी मनीष ने बताया कि 2007 ंमें वह एक अखबार में विज्ञापन देखकर दिल्ली के पटेल नगर निवासी एक महिला अध्यापक के संपर्क में आया। आरोपी ने खुद को एमबीबीएस डॉक्टर बताकर महिला से शादी कर ली। आरोपी ने 2014 में जीवन साथी डॉट कॉम पर प्रोफाइल बनाकर खुद को एमबीबीएस, एमडी और अविवाहित बताया। पंजाब के संगरूर के नर्सिंग होम में डॉक्टर बताया। पिता को भी आरोपी ने एमबीबीएस, एमडी, सेना से रिटायर अधिकारी बताया। प्रोफाइल देखकर अशोक विहार की एक महिला डॉक्टर आरोपी के झांसे में आ गई। 2015 में दोनों ने शादी कर ली। दोनों को एक बेटा हुआ। वर्ष 2018 में महिला डॉक्टर को शक हुआ तो आरोपी ने उसे मारने का प्रयास किया। कीर्ति नगर पुलिस ने पकड़ लिया।

विक्रांत भगत या मनीष कौल। किसी भी नाम से यहां स्वास्थ्य विभाग में फर्जी डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन नहीं मिला। सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन ने शनिवार को इसका रिकॉर्ड निकलवाया। सीएमओ ने बताया कि मेरठ में करीब 900 चिकित्सक पंजीकृत हैं। इनमें से विक्रांत भगत या मनीष कौल नाम का कोई भी चिकित्सक पंजीकृत नहीं है।

स्वास्थ्य विभाग रजिस्ट्रेशन के दौरान मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया यानी एमसीआई (अब एनएमसी) की वेबसाइट पर जाकर उसकी पड़ताल करता है। उसके बाद ही रजिस्ट्रेशन किया जाता है। हालांकि डिग्री होने पर एमसीआई की वेबसाइट पर दस्तावेज मैच करने पर रजिस्ट्रेशन कर दिया जाता है। जांच तब भी की जाती है, जब किसी चिकित्सक के खिलाफ शिकायत की जाती है। ब्यूरो

आईजी ने नौचंदी पुलिस से मांगा फर्जी डॉक्टर का रिकाॅर्ड
आईजी मेरठ रेंज प्रवीण कुमार ने फर्जी डॉक्टर मनीष कौल और विक्रांत भगत का रिकॉर्ड मांगा है। बताया गया है कि विक्रांत के नाम से दो निजी अस्पतालों का लाइसेंस है। पुलिस ने इसकी छानबीन शुरू कर दी है। आरोपी मेरठ में कई अस्पतालों में विजिट करता था। आईजी ने नौचंदी थाना पुलिस से फोन पर बात की और इस पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने निर्देश दिए कि इस फर्जी डॉक्टर की शिकायत पहले किसी ने की या नहीं, इसका रिकार्ड भी खंगाला जाए।

मेरठ में किसी व्यक्ति द्वारा शिकायत मिलती है तो तुरंत मुकदमा दर्ज करें। दोनों क्लीनिक पर सील लगाई जाए और हॉस्पिटल संचालकों से भी पुलिस जानकारी लें। आईजी का कहना कि इस मामले की पुलिस गंभीरता से जांच करेगी। जिले में फर्जी डॉक्टर मनीष कौल उर्फ विक्रांत भगत की पोल खुलने पर कई अस्पतालों में खलबली मच गई है। एक चर्चित डॉक्टर ने नाम न छापने के अनुरोध पर बताया कि शहर में कई फर्जी डिग्री लेकर डॉक्टरी कर रहे हैं। उनके क्लीनिक के साथ अस्पताल हैं। 
 
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फर्जी डॉक्टर के खिलाफ मेडिकल में तहरीर
एक मेडिकल स्टोर संचालक ने फर्जी डॉक्टर के खिलाफ 70 हजार ठगे जाने का  आरोप लगाते हुए तहरीर दी है। इसका क्लीनिक तेजगढ़ी चौराहा स्थित त्यागी मार्केट में था। इसके पास शुभम निवासी जनता कॉलोनी का मेडिकल स्टोर का था।

शुभम ने शनिवार को एसएसपी को शिकायती पत्र दिया। आरोप लगाया है कि फर्जी डॉक्टर में एक प्लाट खरीदने की बात कहकर 70 हजार रुपए लिए और वह वापस नहीं कर रहा था। एसएसपी का कहना है कि शिकायती पत्र पर फर्जी डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा। 

जितनी जगह काम, उतने बदले नाम
मनीष के खिलाफ दिल्ली, मुंबई, पंचकूला, गोवा, बंगलूरू, चंडीगढ़, फरीदाबाद, जयपुर, केरल, अंबाला और काशीपुर उत्तराखंड में करीब 27 मामले दर्ज हैं। आरोपी ने कई जगहों पर खुद का नाम मनीष कौल उर्फ वरुण कौल, मनीष चड्ढा उर्फ डॉक्टर आशुतोष मारवाह, डॉ. विशेष धीमान, डॉ. संजीव चड्ढा, डॉ. एस चौधरी, गौरव सेठी, अनू सेठी और डॉ. विक्रांत भगत बताया था।

दिल्ली पुलिस इसे कई राज्यों में पेश करने के लिए ले गई थी। लेकिन, मुंबई पहुंचने पर आरोपी वसई पुलिस थाना क्षेत्र में टीम को चकमा देकर फरार हो गया था। वहां से भागकर पाली राजस्थान पहुंचा। यहां इसके पिता ने अस्पताल खोला हुआ था। पांच महीने बाद मेरठ आ गया था। 2020 में राजस्थान पुलिस ने मनीष के पिता ब्रिज भूषण कौल उर्फ राजेंद्र पाल कौल को गिरफ्तार कर लिया था।
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