मेरठ। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अधिकारियों द्वारा बिजली चोरी रोकने और बड़े बकायेदारों से बकाया वसूलने में नाकामी का खामियाजा विद्युत उपभोक्ताओं का हर साल बिजली की बढ़ी दरों के रूप में भुगतना पड़ रहा है। लाखों रुपये की पगार जेब में डालने वाले अधिकारी एसी कमरोें से बाहर निकलने में तौहीन समझ रहे हैं। कमीशन की लूट के लिए टेंडरों में अनाप-शनाप रेट से बढ़ते राजस्व घाटे को पाटने के लिए उपभोक्ताओं की जेब पर भार डाला जा रहा है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) द्वारा प्रस्तावित बिजली दरों को हरी झंडी मिलने पर पश्चिमांचल के 50 लाख उपभोक्ताओं की जेब पर प्रतिमाह 200 करोड़ रुपये से ज्यादा का बोझ पड़ने जा रहा है।
यूपीपीसीएल ने एक बार फिर भारी घाटे की बात कहते हुए वर्ष 2019-20 के लिए विद्युत दरों में भारी बढ़ोतरी करने के प्रस्ताव की फाइल उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग को भेज दी है। भेजे गए प्रस्तावों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी शहरी घरेलू और कॉमर्शियल उपभोक्ताओं की दरों में की गई है। ग्रामीण विद्युत दरों में भी 25 फीसदी की बढ़ोतरी का प्रस्ताव भेजा गया है। शहरी घरेलू बिजली दरों की बात करें तो 0-150 यूनिट तक की बिजली दरों को 4.90 रुपये प्रति यूनिट से बढ़ाकर 6.20 रुपये प्रति यूनिट करने का प्रस्ताव भेजा गया है। वहीं, ग्रामीण उपभोक्ताओं की बिजली दर को 400 रुपये प्रति किलोवाट से 500 रुपये प्रति किलोवाट किया गया है।
2 केवी श्रेणी के सर्वाधिक घरेलू उपभोक्ता
0-150 यूनिट के पहले स्लैब में होने वाली 1.30 रुपये प्रति यूनिट की बढ़ोतरी से ही उपभोक्ताओं के वर्तमान बिल में 195 रुपये की बढ़ोतरी हो रही है। कंपनी में 2 किलोवाट श्रेणी के सर्वाधिक शहरी घरेलू उपभोक्ता हैं। आमतौर पर इस श्रेणी के उपभोक्ताओं का 200 यूनिट तक बिल आता है। प्रस्तावित बढ़ी दरें लागू होने पर अब इन उपभोक्ताओं के पास 250 रुपये ज्यादा का बिल पहुंचेगा। वहीं, ग्रामीण उपभोक्ताओं के बिल में भी 100 रुपये प्रति किलोवाट की बढ़ोतरी की गई है।
औसतन 400 रुपये की बढ़ोत्तरी
कंपनी सूत्रों के मुताबिक घरेलू, ग्रामीण और कॉमर्शियल उपभोक्ताओं के बिलों में औसतन 400 रुपये की बढ़ोतरी होने वाली है। इस हिसाब से कंपनी के 50 लाख उपभोक्ताओं की जेब पर 200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ने जा रहा है।
यूं बढ़ रहा घाटा
लगातार घाटे में जा रही बिजली कंपनियों को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने प्रदेश की चारों बिजली कंपनियों को उदय योजना में शामिल किया है। योजना के अंतर्गत कंपनियों को लगातार अपना प्रदर्शन सुधारना है। बिजली चोरी का स्तर कम करते हुए खरीदी गई बिजली के सापेक्ष राजस्व वसूली कर प्रति यूनिट थ्रू रेट बढ़ाना है। लेकिन कंपनियों में बैठे अधिकारी प्राइवेट कंपनियों से महंगी बिजली खरीद बंद नहीं कर रहे हैं। बिजली चोरी का ग्राफ भी तेजी से नीचे नहीं जा पा रहा है। हालांकि केंद्र सरकार द्वारा शहरों और गांवों के लिए चलाई जा रही आईपीडीएस और डीडीयूजीजे योजना के अंतर्गत नए कनेक्शन देने और गांवों में भी मीटर लगाए जाने का कार्य तेजी से चल रहा है।
नलकूप बिल में भी बढ़ोतरी
नलकूप बिल में भी 150 रुपये से बढ़ाकर 170 रुपये प्रति हार्सपावर करने का प्रस्ताव भेजा गया है। किसान पहले से ही बढ़ी दरों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
दर बढ़ी तो होगा आंदोलन
ग्रामीण और नलकूप बिजली दर बढ़ोतरी को देखते हुए भाकियू से लेकर रालोद व सपा ने भी आस्तीनें चढ़ा ली हैं। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत का कहना है कि केंद्र और प्रदेश सरकार ग्रामीणों का जीवन स्तर ऊंचा उठाने में नाकाम रही हैं। भाकियू बिजली बढ़ोतरी का हर स्तर पर विरोध करेगी। रालोद के प्रदेश संगठन प्रभारी डॉ. राजकुमार सांगवान और सपा जिलाध्यक्ष चौधरी राजपाल सिंह ने भी कॉरपोरेशन के इस निर्णय की तीखी आलोचना की है। सांगवान ने कहा कि सरकार किसानों व ग्रामीणों की कमर न तोड़े। पहले किसानों को उनकी फसल का डेढ़ गुणा दाम दे और ग्रामीण बेरोजगारों को रोजगार दे। उसके बाद बिजली दरें संशोधित करे।
--
ये हैं प्रस्ताव
शहरी घरेलू उपभोक्ता
यूनिट वर्तमान दर प्रस्तावित दर
0 से 150 4.90 6.20
151-300 5.40 6.50
301-500 6.20 7.00
500 से ऊपर 6.50 7.50
(दरें रुपये में)