लोगों को आज भी भले ही थाना पुलिस का व्यवहार पसंद न आता हो। लेकिन यूपी 100 की शुरूआत से न सिर्फ यूपी पुलिस का चेहरा बदला है, बल्कि पुलिस के प्रति विश्वास भी बढ़ा है। शहर और देहात में प्रमुख प्वाइंटों पर यूपी 100 की गाड़ी खड़ी मिलने से रात की सुरक्षा भी मजबूत हुई है।
लखनऊ में आधुनिक कंट्रोल रूम बनने के बाद 19 नवंबर को जिले में यूपी 100 की शुरूआत हुई थी। जिसमें जिले को अत्याधुनिक उपकरणों से लैस इनोवा और बोलेरो सहित 61 गाड़ियां मिली थीं। यूपी 100 की तीन गाड़ियां पुलिस लाइन में रिजर्व में हैं। वहीं 58 गाड़ियां शहर और देहात में अलग-अलग थाना क्षेत्रों में 24 घंटे चल रही हैं। 100 नंबर डायल करने पर सीधे लखनऊ कंट्रोल रूम में घंटी बजती है। जिसके बाद वहीं से संबंधित थाने की पीआरवी (पुलिस रिस्पांस व्हीकल) यानी यूपी 100 की गाड़ी को भेजा जाता है।
अधिकतम रिस्पांस टाइम 19 मिनट
जिले में किसी भी घटना पर पहुंचने के लिए यूपी 100 की गाड़ी को अधिकतम 19 मिनट का समय लग रहा है। प्रत्येक थाना क्षेत्र में गाड़ी का प्वाइंट प्रत्येक घंटे बदल रहा है। जिनमें रूट पर ही पुलिसकर्मियों की बदली होती है।
यूपी 100 से बढ़ा विश्वास
10 दिसंबर : जानी निवासी हिमांशु ने कंट्रोल रूम को सूचना दी कि वह परिवार के साथ जा रहा था। उनकी कार का तेल खत्म हो गया है। जिसके बाद 579 पीआरवी मौके पर पहुंची और परिवार के एक सदस्य को लेकर पेट्रोल पंप पर पहुंची। तेल की व्यवस्था कराकर वापस उनकी कार के पास छोड़ा।
15 दिसंबर : संजय ने रात को सूचना दी कि हापुड़ रोड पर संदिग्ध लोग पीछा कर रहे हैं। जिसके बाद यूपी 100 पुलिस ने अपनी गाड़ी से पीड़ित दंपति को खरखौदा थाने के पास तक पहुंचाया।
21 दिसंबर : अंबेडकर चौराहे के पास जितेंद्र ने सड़क हादसे की कंट्रोल रूम को सूचना दी। जिसके बाद यूपी 100 की गाड़ी चार मिनट में मौके पर पहुंची और घायल को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया।
22 दिसंबर : हापुड़ रोड पर सूरज ने सूचना दी कि स्विफ्ट कार सवार लोग पेट्रोल पंप से तेल भरवाकर फरार हो गए। जिसके बाद यूपी 100 की गाड़ी ने कार सवार लोगों को पकड़कर खरखौदा थाने को सौंपा।
22 दिसंबर - अमित ने सूचना दी कि बागपत रोड पर बस ने कार में टक्कर मार दी। जिसके बाद यूपी 100 की गाड़ी ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया।
रोजाना 250 से 400 कॉल
कंट्रोल रूम के एसएसआई शशि कुमार के अनुसार रोजाना 250 से 400 कॉल आ रही हैं। जिनमें शहर की शिकायतें ज्यादा हैं। सबसे अधिक मामले घरेलू विवाद के आ रहे हैं। छावनी क्षेत्र में कई बार सिग्नल नहीं आते। ऐसे में लखनऊ कंट्रोल रूम का मेसेज सीधे पुलिस लाइन में लगे कंप्यूटर पर पहुंचता है। जहां तैनात पुलिसकर्मी वायरलेस सेट से यूपी 100 को सूचना देते हैं। कई बार एक थाना क्षेत्र में दो या तीन घटना होने पर दूसरे थाने की पीवीआर भी भेजी जाती हैं।
यूपी 100 पुलिस बिल्कुल अलग तरह से काम कर रही है। इससे लोगों की सुरक्षा के साथ पुलिस के प्रति विश्वास भी बढ़ा है।- जे. रविंदर गौड़, एसएसपी