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बासमती की 1121 को टक्कर देगी 1718 प्रजाति

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मोदीपुरम (मेरठ)। सबसे ज्यादा निर्यात होने वाली बासमती की 1121 प्रजाति को टक्कर देने के लिए बासमती की नई प्रजाति 1718 किसानों को मालामाल करेगी। यह प्रजाति जहां सामान्य प्रजाति से अधिक उत्पादन देगी। वहीं रोग भी नहीं लगेगा। इसका बीज इस बार बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान (बीईडीएफ) मोदीपुरम के कृषि फार्म पर तैयार कर किसानों को दिया गया है। गुणवत्ता बेहतर इस प्रजाति से निर्यात भी बढ़ाया जाएगा।
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अभी तक सबसे ज्यादा पूसा बासमती 1121 प्रजाति को ही निर्यात किया जा रहा है। विदेशों में सभी जगह पर 1121 प्रजाति को ही भेजा जाता है। इस प्रजाति में भी पेस्टीसाइड की समस्या को लेकर कई बार परेशानी आई है। इस प्रजाति को टक्कर देने और निर्यात बढ़ाने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली ने पूसा बासमती 1718 प्रजाति का विकास किया है।
यह है इसकी खासियत
इसकी खासियत यह है कि इसमें दो जीन डाले गए हैं, एक्सए 9 और एक्स ए21। इन जीन से बासमती की फसल में बैक्टेरियल लीफ ब्लाइट (जीवाणु झुलसा) बीमारी नहीं आएगी। साथ ही दाना झड़ने की समस्या नहीं होगी। प्रति एकड़ उपज भी ज्यादा होगी। इस बार बीईडीएफ में किसानों को सबसे ज्यादा इस बीज के प्रति जागरूक किया गया है।
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ये प्रजाति की खासियत
- प्रति एकड़ उपज 3-5 क्विंटल अधिक है
- दाना झड़ने की समस्या बहुत कम है
- गुणवत्ता अच्छी है और लंबा दाना है
- पेस्टीसाइड का असर कोई नहीं है
- इस प्रजाति में जीवाणु झुलसा बीमारी नहीं लगेगी
- इस प्रजाति को दो जीन डालकर तैयार किया गया है
- दाना लंबे के साथ साथ साफ सुथरा भी है
- यह यूपी समेत सात राज्यों के मौसम के लिए अनुकूल है
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एक्सपोर्ट की स्थिति
बासमती चावल - 22 प्रतिशत
गैर बासमती चावल - 15.5 प्रतिशत
कुल एक्सपोर्ट चावल - 37.5 प्रतिशत
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निर्यात-आमदनी की स्थिति
वर्ष 2018-2019
बासमती निर्यात - 44.58 लाख टन
आमदनी - 32806 करोड़ रुपये
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कहां कितना निर्यात
देश प्रतिशत
ईरान 21.7
सऊदी अरब 20 प्रतिशत
यूएई 10.5 प्रतिशत
ईराक 10.4 प्रतिशत
यूरोप 9 प्रतिशत
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भारत सबसे बड़ा निर्यातक
बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रभारी डॉ. रितेश शर्मा के अनुसार दुनिया के 70 प्रतिशत बासमती चावल की उपज भारत में ही होती है। भारत के बाद पाकिस्तान का नंबर आता है। भारत ही यूरोपियन संघ और शेष विश्व में बासमती चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है। हर साल यहां पर निर्यात की संख्या बढ़ती जा रही है। देश से जितना चावल निर्यात होगा, उससे ज्यादा दाम भी मिलेगा, जिससे किसानों को लाभ होगा।
दूसरी प्रजाति थी जरूरी
अभी तक विदेशों में 1121 प्रजाति का ही निर्यात हो रहा था, जब दूसरी प्रजाति 1718 का निर्यात बढे़गा तो इसका लाभ भी जरूर मिलेगा। एक प्रजाति के निर्यात के कारण राइस इंडस्ट्री को भी परेशानी होती थी। विकल्प के तौर पर दूसरी व्यवस्था होना बहुत जरूरी थी। जिसके बाद भारतीय कृषि अनुसंधान परिषाद नई दिल्ली के वैज्ञानिकों ने इस प्रजाति को तैयार किया और यूपी, उत्तरांचल, हिमाचल प्रदेश जम्मू एंड कश्मीर, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब आदि प्रदेशों के लिए भी यह प्रजाति अनुकूल है।
किसानों के लिए होगी लाभकारी - फोटो
बासमती की नयी प्रजाति 1718 अच्छी रहेगी। इसका उत्पादन भी सामान्य प्रजाति से ज्यादा है। रोग भी नहीं लगेगा और गुणवत्ता के साथ दाना भी लंबा है। इस प्रजाति के आने से निर्यात भी बढ़ेगा और किसान भी लाभान्वित होंगे। इस बार किसानों को अधिक बीज दिया गया है। इसके प्रजाति के प्रति जागरूक भी किया गया है। -डॉ. रितेश शर्मा, प्रभारी एवं प्रधान वैज्ञानिक, बीईडीएफ मोदीपुरम
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