दुर्लभ वनस्पतियों के संरक्षण के लिए कवायद, बढ़ाई जाएगी पंचायतों की भागीदारी
हस्तिनापुर। सामाजिक वानिकी प्रभाग द्वारा हस्तिनापुर के वानिकी प्रशिक्षण केंद्र के गंगा व्याख्यान केंद्र में जैव विविधता गोष्ठी का आयोजन किया गया।
मुख्य वक्ता सेवानिवृत्त जैव विविधता विशेषज्ञ एके पंत ने कहा कि हस्तिनापुर सेंक्चुअरि में जैव विविधता अनुकूल पाई जाती है। इसका स्तर बनाए रखने की जरूरत है। यहां प्रवासी पक्षी सर्दियों के मौसम में रहवास के लिए आते हैं, जो यहां पर कई महीनों तक रुककर प्रजनन करते हैं और अपने परिवार के साथ अपने वतन लौट जाते हैं। उन पक्षियों के लिए सेंक्चुअरि में पर्याप्त भोजन और सुरक्षा की व्यवस्था है। इस व्यवस्था और मजबूत करने के लिए उच्च अधिकारियों द्वारा कई परियोजनाएं तैयार की जा रही हैं।
वन संरक्षक गंगा प्रसाद ने कहा कि वैज्ञानिकों का कहना है कि इस समय देश और दुनिया जैव विविधता संकट, जलवायु संकट और वायु प्रदूषण संकट का सामना कर रही है, लेकिन वास्तव में ये सभी मुद्दे आपस में जुड़े हुए हैं। जैव विविधता को बचाने के लिए वन विभाग अब ग्रामीणों को साथ लेकर काम करेगा। दुर्लभ वनस्पतियों के संरक्षण व लोकल प्रजातियों का अस्तित्व बचाने के लिए पंचायतों की भागीदारी को बढ़ाया जाएगा।
डीएफओ राजेश कुमार ने कहा कि सेंक्चुअरि क्षेत्र में जैव विविधता को बचाए रखने के लिय पंचायत स्तर पर काम किया जाएगा। ताकि जमीनी स्तर पर काम हो सके। सेंक्चुअरि क्षेत्र और गंगा के तटवर्ती इलाकों के ग्रामीणों का सुझाव भी अहम माना जाएगा।
एसएन चौरसिया, ग्राम्य विकास अधिकारी, सहायक नगर आयुक्त इंद्र विजय, जिला कृषि अधिकारी प्रमोद सिरोही, वन संरक्षक गंगा प्रसाद, प्रभागीय निदेशक कन्हैया पटेल, राजेश कुमार, मनीष सिंह, प्रभागीय वनाधिकारी विनिता सिंह, श्वेता सैन व अन्य मौजूद रहे।