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एक्सक्लूसिव रिपोर्ट: बासमती की फसल को ‘बकानी रोग’ ने जकड़ा, पहले जानें कारण फिर ऐसे बचाव करें किसान

Fri, 09 Aug 2019 11:52 AM IST
कपिल kapil मोहित कुमार, अमर उजाला, मोदीपुरम, मेरठ
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बासमती की फसल - फोटो : अमर उजाला
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प्री मानसून बारिश कमजोर होने से इसके साइड इफेक्ट सामने आने शुरू हो गए हैं। पश्चिमी यूपी में बासमती की फसल को बकानी (झंडा रोग) ने जकड़ लिया है। कृषि विज्ञानियों की मानें तो पहली बार इस रोग का प्रकोप सबसे ज्यादा देखा गया है। इसके चलते सर्वाधिक बासमती उत्पादन करने वाले छह राज्यों और जिलों में इस रोग के हमले से धान की लाखों बीघा फसल नष्ट हो गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी इसका ज्यादा असर देखा जा रहा है। काफी नुकसान से किसान चिंतित हैं। वैज्ञानिकों का सुझाव है कि इस बीमारी का असर देखते ही पौधे को उखाड़ दें।

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क्या हैं कारण
बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान (बीईडीएफ) मोदीपुरम के प्रधान वैज्ञानिक व प्रभारी डॉ. रितेश शर्मा के अनुसार प्री मानसून बारिश काफी कमजोर रही। इसके बाद मानसून की बारिश भी देरी से हुई और उतनी नहीं पड़ी, जितनी पड़नी चाहिए थी। मानसूनी बारिश न होने के कारण उसका असर बासमती की फसल पर साफ दिखाई दे रहा है। बासमती की फसल को समय से पहले ही बकानी रोग ने झटका दे दिया है।

ये हैं लक्षण
डॉ. शर्मा के अनुसार बकानी रोग बासमती धान के पौधे में फ्यूजेरियम मोनिलिफोरमी नामक कवक से होता है। पौधशाला में रोगग्रस्त पौधा, स्वस्थ पौधे की अपेक्षा असामान्य लंबा होता है। उच्च भूमि में पौधे के बिना लंबा हुए ही तल गलन या पद गलन के लक्षण मिलते है। ऐसे पौधे कुछ दिनों में ही सूख जाते हैं। वहीं कुछ दिन में पूरे खेत के पौधे नष्ट हो जाते हैं। तीन से चार दिन के अंतराल में पूरी फसल को नष्ट कर देता है। डॉ. रितेश शर्मा के अनुसार बीईडीएफ की टीम ने पश्चिमी यूपी के बुलंदशहर, बागपत, मुरादाबाद, मेरठ, गाजियाबाद, बदायूं आदि जनपदों का दौरा किया है, जिसमें काफी चिंताजनक हालात सामने आए हैं। कई स्थानों पर किसानों की पूरी फसल नष्ट हो गई है। टीम के सदस्यों के मुताबिक पहली बार इस रोग का प्रकोप सर्वाधिक देखा गया है। पश्चिमी यूपी के अलावा टीम उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा के दौरे पर है। वहां भी चौंकाने वाले परिणाम सामने आ रहे हैं।

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जिन खेतों में बीमारी की शुरुआत, वहां से उखाड़ दें पौधे
बासमती धान की खेती से अधिक लाभ के कारण बासमती उत्पादन में बदलाव देखने को मिला है। बकानी रोग से फसल में 5 से 10 प्रतिशत तक नुकसान होता है। धान की पीबी वन, 1509, बासमती, 1121 पूसा, 1401 आदि प्रजातियों में इस रोग का असर ज्यादा है। वैज्ञानिकों के अनुसार बकानी से बचने के लिए ट्राकोडर्मा अथवा कार्बेडाजिम के घोल में पौध को कम से कम एक घंटे डुबाकर रखें। वहीं, अभी जिन खेतों में इस बीमारी की शुरुआत है, पौधे को तुरंत उखाड़ दें। साथ ही दो किलो ट्राइकोडर्मा प्रति एकड़ गोबर की खाद में मिलाकर डालें। आवश्यकतानुसार सुडमोमोनास का स्प्रे करें। ज्यादा तापमान में फंगस ज्यादा बढ़ता है, जिससे बीमारी अधिक फैलती है।

कर रहे किसानों को जागरूक
इस बार बासमती की फसल में बकानी रोग का असर ज्यादा है। प्री मानसून बारिश न होने से कारण यह बीमारी फैली है। हमारी टीमें पश्चिमी यूपी के बाद हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड के दौरे पर हैं। इन राज्यों में भी रोग होने पर किसान खेतों को जोत रहे हैं। किसानों को इस बीमारी के प्रति जागरूक किया जा रहा है। - डॉ. रितेश शर्मा, प्रभारी एवं प्रधान वैज्ञानिक बीईडीएफ

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