योगी सरकार की पुलिस से जनता को आस लगाना सबसे बड़ी भूल हैं, क्योंकि पुलिस के लिए ड्यूटी से ज्यादा सोना जरूरी है। यह पोल तब खुली जब अमर उजाला के कैमरे में थानाध्यक्ष एसी में कंबल ओढ़कर खर्राटे लेते मिले।
सोमवार दोपहर 3:30 बजे। शहर का वीआईपी थाना सिविल लाइन सूना पड़ा था। थाना कार्यालय से लेकर आगंतुक कक्ष और संगीन लेकर थाने में तैनात रहने वाला संतरी तक गायब था। थानाध्यक्ष के कमरे का जायजा लिया गया तो वह एसी में कंबल ओढ़कर खर्राटे लेते मिले। अमर उजाला ने भरी दोपहरी में पुलिस व्यवस्था की इस घोर लापरवाही को कैमरे में कैद कर लिया।
महत्वपूर्ण है यह थाना
थाना सिविल लाइन शहर का सबसे महत्वपूर्ण थाना है। इस थाना क्षेत्र में कचहरी, कलक्ट्रेट, एमडीए, कमिश्नरी, डीएम और एसएसपी ऑफिस से लेकर पुलिस, प्रशासनिक और न्यायिक अफसरों के आवास आते हैं। कई मुख्य बाजार, मवाना बस अड्डा, स्टेडियम, बड़े अस्पताल, कई पॉश कॉलोनियां और मिश्रित आबादी वाले क्षेत्र हैं।
सब भगवान भरोसे
थाने से पुलिस गायब
एसएसपी जे. रविंदर गौड़ चार दिनों की छुट्टी पर हैं। जिले का चार्ज इस समय एसपी सिटी मानसिंह चौहान पर है। सुबह-शाम पुलिस टीमें शहर में सघन चेकिंग कर रही हैं। लेकिन दोपहर को शहर भगवान भरोसे होता हैं। लूट या अन्य आपराधिक वारदात बदमाश कर जाएं तो पुलिस मौके पर नहीं पहुंचेगी। क्योंकि यह समय तो पुलिस के खर्राटे भरने का होता हैं।
स्टिंग में खुली पोल
अमर उजाला की टीम जब दोपहर में सिविल लाइन थाने पहुंची तो थाना कार्यालय, थाना प्रभारी का कार्यालय और आगंतुक कक्ष से पुलिस नदारद थी। दिवस अधिकारी (डे ऑफिसर) और हेड मोहर्रिर से लेकर थाने का संतरी तक गायब था। सन्नाटे में डूबे इस थाने में एक अनजान आदमी जरूर बैठा मिला, जिसका थाने से कोई लेना-देना नहीं था। उससे थाना प्रभारी के बारे में पूछा गया तो उसने थाना परिसर में ही बने थाना प्रभारी के कमरे की तरफ इशारा कर दिया। जब टीम थाना प्रभारी के कमरे में पहुंची तो हैरान रह गई। कमरे में एसी चल रहा था और थाना प्रभारी कंबल ओढ़कर सोते मिले। सवाल है कि दोपहर को कोई पीड़ित थाने पहुंचे तो किससे शिकायत करे। क्योंकि थाने में कोई जिम्मेदार अधिकारी तो दूर सिपाही तक मौजूद नहीं मिला।
थाने में मच गई खलबली
थाने में नहीं मिला एक भी पुलिस वाला
कुछ देर बाद थाने का मुंशी टहलता हुआ थाने में प्रवेश करता मिला। इसके बाद अमर उजाला के स्टिंग की जानकारी पुलिसकर्मियों को लगी तो उनमें खलबली मच गई। कई पुलिसकर्मियों ने अपने खास लोगों से फोन कराकर समाचार रुकवाने की सिफारिश की। लेकिन सवाल किसी थाने की पुलिस का नहीं, शहर की कानून व्यवस्था का है। सूबे के मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक थाना पुलिस की छवि सुधारने का प्रयास कर रहे हैं और पुलिस उसे और खराब करने में लगी है।
मेरी तबियत खराब थी
थानाध्यक्ष सिविल लाइन धनवीर सिंह मेरी तबियत खराब थी। थोड़ी देर आराम करने के लिए कमरे में चला गया था। इस बीच थाने से पुलिस गायब थी तो मैं खुद इसकी जांच करूंगा।
लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी
प्रभारी एसएसपी मानसिंह चौहान का कहना है कि दोपहर में थाने में ऐसी हालत है तो औचक निरीक्षण कर कार्रवाई की जाएगी। कानून व्यवस्था के प्रति कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। इस मामले में थाना प्रभारी से जवाब मांगा जाएगा।
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