जकार्ता एशियाई खेलों में भारत की टीम पदक नहीं जीत पाई। क्वार्टर फाइनल में हार की वजह क्या थी?
उत्तर: भारतीय टीम ने एशियाड में छह मैच खेले और तीन जीते। जापान के विरुद्ध क्वार्टर फाइनल में 3-1 से हार मिली। अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का कम अनुभव मुख्य कारण रहा।
32 साल पहले भारत ने वर्ष 1986 के एशियाई खेलों में अंतिम बार कांस्य पदक जीता था। भारतीय टीम कैसे विश्व की श्रेष्ठ टीम बन पाएगी?
उत्तर: वॉलीबॉल अमेरिका का मुख्य खेल है। अमेरिका, रूस और ब्राजील दुनिया की टॉप टीमें हैं। एशिया में ईरान टीम सबसे अच्छी है। विश्व की श्रेष्ठ टीमों से भारत को अधिक अभ्यास मैच खेलने होंगे, तभी पदक की उम्मीदें बढ़ेगी। एशियाड से पहले जून माह में कतर में टीम को अभ्यास मैचों के लिए भेजा गया था, मगर यह पर्याप्त नहीं रहा।
विनीत कुमार वॉलीबाल खिलाड़ी
- फोटो : अमर उजाला
यूपी से भारतीय टीम में एकमात्र वॉलीबॉल खिलाड़ी चुने गए। गांव में वॉलीबॉल खूब खेला जाता है, फिर भी कम खिलाड़ी क्यों सामने आए हैं ?
उत्तर: ग्रामीण अंचल में खेलों का माहौल बनाने में सरकारें नाकाम है। वेस्ट यूपी में कोई स्पोर्ट्स कॉलेज नहीं है। लखनऊ, वाराणसी और कानपुर मंडल में ज्यादा स्टेडियम और साईं सेंटर है। अपने गांव बुड़ीना कलां से अकेला पहला खिलाड़ी हूं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल रहा है। माहौल बदला तो गांव का मयंक हरियाणा के सिरसा स्पोर्ट्स हॉस्टल तथा विपुल लाटियान दिल्ली के प्रीतमपुरा हॉस्टल का प्रशिक्षु वॉलीबॉल खिलाड़ी है।
फिटनेस और संपूर्ण डाइट प्रत्येक खिलाड़ी की जरूरत है। चाहे क्रिकेट हो या वॉलीबॉल,फिटनेस से ही लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल सकते हैं। वॉलीबॉल में नई प्रतिभाओं को आगे आना चाहिए। जुलाई में दक्षिणी अफ्रीका के जोहानसबर्ग में ब्रिक्स गेम्स में अंडर-21 में भारत की टीम ने कांस्य पदक जीता है, जबकि बालिका टीम ने फाइनल में चीन को हराकर रजत पदक जीता। स्पष्ट है कि वॉलीबॉल में नए खिलाड़ियों के चमकने के पर्याप्त मौके है।
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