ड्रग इंस्पेक्टरों की कमी की वजह से दवा विक्रेता लाइसेंस नवीनीकरण, सत्यापन आदि को लेकर भी परेशान रहते हैं। इन पदों को भरने के लिए कई बार पत्र लिखा गया, लेकिन अभी तक पोस्ट को भरने के लिए कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।
शुरू नहीं हुई लैब
दवाओं की जांच के लिए मेरठ की लैब अभी शुरू नहीं हो पाई है। दवाओं के सैंपल जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला में भेजे जाते हैं। वहां सैंपलों की संख्या ज्यादा होने के कारण रिपोर्ट आने में देरी होती है। ड्रग इंस्पेक्टर पवन कुमार शाक्य का स्थानांतरण मुजफ्फरनगर जिले में कर दिया गया है, इनकी जगह पीयूष कुमार नए ड्रग इंस्पेक्टर आए हैं। एक इंस्पेक्टर प्रियंका चौधरी हैं।
रिपोर्ट आने में समय लग जाता है
रिपोर्ट आने में समय लगता है। तीन माह से करीब 100 दवा सैंपलों की रिपोर्ट नहीं आई है। वैसे दो माह का समय तो कम से कम लगता ही है। - प्रियंका चौधरी, ड्रग इंस्पेक्टर
इन दवाओं के लिए थे सैंपल
बुखार, खांसी, जुकाम, स्किन, कफ सीरप, पेट दर्द और एंटीबायोटिक आदि दवाओं में यह जांच की जाती है कि जो रेपर पर लिखा है, वह मानक के अनुरूप है या नहीं। दवा में संबंधित साल्ट की मात्रा ज्यादा या कम तो नहीं है। यह भी जांचा जाता है कि जिस कंपनी की दवा है उसके पास इस दवा को बनाने का लाइसेंस है या नहीं।