बस बचाव ही इसका उपचार
सीएमओ डॉ. राजकुमार ने बताया कि ऐसे में यह सही है कि बचाव ही इसका उपचार है। सोशल डिस्टेंसिंग सबसे ज्यादा जरूरी है। अपने हाथ बार-बार मुंह, नाक व आंख पर नहीं लगाएं, ताकि वायरस शरीर के अंदर नहीं जा पाए। कोरोना पॉजिटिव आए मरीजों की एक नहीं दो-दो बार जांच की गई। पता चला कि जो कोरोना के मरीज के साथ घर में रहे भी। लेकिन उसके ज्यादा पास नहीं रहे उनमें से बहुतों को कोरोना नेगेटिव आया है।
चिंताजनक पहलू: कई मरीजों में नहीं थे लक्षण, निकला कोरोना
कोरोना पॉजिटिव आए इन 74 मरीजों में कई मरीज ऐसे भी थे जिन्हें जांच से पहले कोरोना जैसे लक्षण नहीं थे। वे पूरी तरह से स्वस्थ नजर आ रहे थे। लेकिन जब उनके संपर्क वाला कोई व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव आया और फिर इनकी जांच कराई गई तो पता चला यह भी कोरोना पॉजिटिव हैं। संतोष अस्पताल के अकाउंटेंट चंद्रपाल के 16 वर्षीय पुत्र के साथ ऐसा ही है। उसमें कोरोना जैसे लक्षण नहीं हैं। इसके अलावा अधिकांश जमातियों के साथ भी इसी तरह की स्थिति थी, यही वजह थी कि इस तरह की अफवाह फैलाई जा रही थी कि जमातियों को कोरोना नहीं है।
कई दिन तक जिंदा रह सकता है कोरोना
चीन के वुहान से शुरू होकर दुनिया भर में फैले कोरोना के कहर से लोग खौफजदा हैं। उनके मन में इसे लेकर कई तरह के सवाल भी हैं। जिनमें एक है कि वायरस कितने वक्त तक जिंदा रह सकता है। मेडिकल की माइक्रोबायोलॉजी लैब के प्रभारी डॉ. अमित गर्ग बताते हैं कि कोरोना वायरस शरीर से बाहर कई दिन तक जिंदा रह सकता है, जबकि मेटल पर ये करीब 12 घंटे तक जिंदा रह सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, स्किन पर ये वायरस महज 10 मिनट ही जिंदा रह पाता है। ऐसे में किसी मेटल या संक्रमित चीज को छूने के बाद अच्छे से हाथ धोकर इसकी चपेट में आने से बचाव किया जा सकता है।
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