- सरूरपुर थाना क्षेत्र के गांव गोटका के पास हुआ हादसा
- बुधवार देर रात भट्ठे से बाइक से लौट रहे थे सचिन, किसी वाहन ने टक्कर मारी
संवाद न्यूज एजेंसी
सरूरपुर/मेरठ। थाना क्षेत्र के मेरठ-करनाल हाईवे पर गांव गोटका के पास बुधवार देर रात किसी वाहन की टक्कर से बाइक सवार पूर्व सैनिक सचिन (39) की मौत हो गई। वह बपारसी स्थित ईंट भट्ठे से बाइक पर सवार होकर अपने गांव जंगेठी लौट रहे थे। इसी बीच अज्ञात वाहन की उसकी बाइक से टक्कर हो गई। हादसे की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस टक्कर मारने वाले वाहन की तलाश में जुटी है।
जानकारी के अनुसार, कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र के गांव जंगेठी निवासी सचिन पुत्र सत्यवीर वायु सेना से सेवानिवृत्त थे। डेढ़ साल पहले सेना से सेवानिवृत होने पर वह गांव बपारसी में स्थित ईंट भट्टे का संचालन करते थे। बुधवार देर रात वह भट्ठे से बाइक पर सवार होकर घर लौट रहे थे। जैसे ही वह गांव गोटका के सामने पेट्रोल पंप के पास पहुंचे तो पीछे अज्ञात वाहन की उनकी बाइक से टक्कर हो गई। टक्कर लगने से सचिन सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।
सूचना पर पहुंची सरूरपुर पुलिस ने घायल सचिन को अस्पताल पहुंचाया। जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पूर्व सैनिक की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम पसर गया। परिजनों का रोकर बुरा हाल है। वरिष्ठ रालोद नेता रणवीर सिंह दहिया, रवि भारत चिकारा, आदित्य कुमार, नीतू, अनुज सहरावत ने गांव पहुंच कर परिजनों को सांत्वना दी।
हादसे के बाद आरोपी चालक वाहन समेत मौके से भाग गया।
सीओ सरधना आशुतोष कुमार का कहना है कि पीड़ित परिवार की ओर से कोई तहरीर नहीं दी गई है। पुलिस हाईवे पर लगे सीसीटीवी कैमरों और अन्य माध्यमों से टक्कर मारने वाले वाहन की पहचान करने का प्रयास कर रही है।
करवाचौथ पर उजड़ी संगीता का दुनिया
पूर्व सैनिक सचिन की मौत से पत्नी संगीता की दुनिया उजड़ गई। करवाचौथ पर पति को खोने के गम में उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। वहीं, महज 13 वर्ष की उम्र में शांतनु के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। जिस उम्र में पिता का हाथ थामकर उसे जिंदगी की राह पर आगे बढ़ना सीखना था, उस उम्र में उसे पिता के बिना जीने की हकीकत से रूबरू होना पड़ा। सचिन की मौत से परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं। संगीता के सामने जहां जिंदगी का लंबा सफर और बेटे के भविष्य की चिंता है, वहीं शांतनु के लिए पिता को खोने का दर्द ऐसा है, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती।
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