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चिंताजनक: बागपत में हर दूसरी महिला खून की कमी से पीड़ित, रोजाना पहुंच रहीं 350 से अधिक एनीमिया ग्रस्त महिलाएं

Sun, 12 Feb 2023 02:33 PM IST
Dimple Sirohi मुकेश पंवार, अमर उजाला डेस्क, बागपत

सार

स्वास्थ्य विभाग की तमाम कोशिशों के बावजूद महिला स्वास्थ्य को लेकर उत्तर प्रदेश के बागपत जनपद में कोई खास सुधार नजर नहीं आ रहा है। जिले की हर दूसरी महिला खून की कमी से जूझ रही है। इनमें गर्भवती महिलाओं के साथ सामान्य महिलाएं भी शामिल हैं।
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बागपत अस्पताल में जांच के लिए पहुंची महिला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आधी आबादी में एनीमिया (रक्ताल्पता) गंभीर समस्या है। जनपद की किशोरियां एवं गर्भवतियों से लेकर सामान्य महिलाएं तक चपेट में हैं। हैरानी की बात यह है कि जिले की 50 प्रतिशत गर्भवती और 30 फीसदी सामान्य महिलाओं समेत करीब 20 फीसदी किशोरियां खून की कमी से जूझ रही हैं। पीएचसी, सीएचसी और जिला अस्पताल में रोजाना आने वाली कुल 750 महिला मरीजों में करीब 350 महिलाएं एनीमिया रोग से ग्रस्त पहुंच रही हैं। यह आलम तब है जब प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अतिरिक्त तमाम ऐसी योजनाएं संचालित हैं। ये महिला स्वास्थ्य से जुड़ी हैं।

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शासन की ओर से गर्भवती महिलाओं के लिए संचालित जननी सुरक्षा योजना में प्रसव के बाद 1400 रुपये मुहैया कराया जा रहा है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत महिलाओं को गर्भधारण से लेकर प्रसव के बाद नवजात का टीकाकरण कराने तक तीन किस्तों में 5000 रुपये मिलते हैं। हर माह की नौ तारीख को जिला महिला अस्पताल के अतिरिक्त सीएचसी, पीएचसी पर प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षित अभियान दिवस मनाया जाता है। इसमें गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण के दौरान जांचकर आयरन और कैल्शियम की टेबलेट देकर खानपान के प्रति जागरूक किया जाता है। 

इसके बावजूद जिले में खून की कमी से पीड़ित किशोरियों से लेकर गर्भवती एवं सामान्य महिलाओं की संख्या में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है। यह स्थिति तब है जब शासन स्तर से तमाम योजनाएं चल रही हैं। इसके बावजूद किशोरियों एवं गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन की कमी पाई जा रही है। 50 फीसदी गभर्वती महिलाएं, 30 फीसदी सामान्य महिलाएं व 20 फीसदी किशोरियाें में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम मिला है। 
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महिलाएं करा रहीं एनीमिया का उपचार
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जनपद में 23 पीएचसी, एक जिला अस्पताल व आठ सीएचसी हैं। जिनमें रोजाना 750 से अधिक महिलाएं विभिन्न रोगों से ग्रस्त होने पर उपचार कराने के लिए आती हैं। जिनमें से लगभग 175 गभर्वती, 115 सामान्य महिलाएं व 60 किशोरियां एनीमिया रोग से ग्रस्त होने के चलते उपचार करा रही हैं। 

एनीमिया के लक्षण
एनीमिया का मतलब है हीमोग्लोबिन में कमी होना है। थकान, काम करने में मन न लगना, सुस्ती बनी रहना आदि इसके लक्षण हैं। इससे आंत की बीमारी में शरीर में पोषक तत्वों का अवशोषण प्रभावित हो जाता है। वहीं, महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान खून की कमी होने और इसके अनुपात में पोषक तत्वों का सेवन न करने से महिलाओं में इसका जोखिम अधिक रहता है।

एनीमिया से बचाव का तरीका
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात महिला रोग विशेषज्ञ डाॅ. शहजमानी मुताबिक बदलती जीवनशैली के साथ आहार संबंधी आदतों में होने वाला बदलाव से महिलाएं एनीमिया से ग्रस्त हो रही हैं। इनमें तत्काल सुधार की आवश्यकता है। वहीं, गर्भावस्था में मौसमी हरी सब्जियां, फल, गुड़, चना, पालक, मेथी आदि का सेवन करें। मां के स्वस्थ होने से गर्भस्थ शिशु तंदुरुस्त होगा। रक्त की कमी से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है। इसका असर उस पर उम्र भर रहता है। इसलिए समय रहते सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।

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ऐसे होता है एनीमिया
-दो बच्चों के जन्म में अंतर कम होना।
-मां का स्वास्थ्य प्रभावित होने का बच्चों पर असर पड़ना।
-मां का पर्याप्त दवा एवं आहार न लेना।
एनीमिया से ये हो सकती है परेशानी
-बार-बार बीमार होना। कृमि से पूरी तरह से बचाव करना।
-कुपोषण के शिकार होने का खतरा।
-गर्भ में बच्चे का ठीक से विकास नहीं हो पाता है।
-गर्भपात का खतरा बना रहता है।
-ऑक्सीजन की कमी होने लगती।
-बच्चों का शारीरिक व मानसिक विकास रुकना, चिड़चिड़ापन होना, भूख न लगना।
-प्रसव के बाद अधिक रक्तस्राव होने से जच्चा की जान को खतरा रहता है।

सामान्य महिला को चाहिए 11 फीसदी हीमोग्लोबिन
एक सामान्य महिला के शरीर में 11 से 15 ग्राम प्रति डेसीलीटर रक्त होना चाहिए। सात ग्राम प्रति डेसीलीटर से कम रक्त होना अधिक खतरनाक है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को एनीमिया से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से कई योजनाएं चल रही हैं। शासन से पौष्टिक आहार का सेवन करने के लिए धनराशि तक दी जाती है ताकि गर्भावस्था में महिलाएं पौष्टिक आहार का सेवन कर सकें।  -डाॅ. विजय कुमार, सीएचसी अधीक्षक 
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